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12 Feb
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संतरा और मौसंबी में अंबिया बहार | Ambia Bahar in Orange and Sweet Lime

संतरा और मौसंबी भारतीय फलों में से दो अद्वितीय और प्रसिद्ध फल हैं, जो अपने स्वाद और पोषण से विख्यात हैं। इन दोनों फलों में विटामिन सी की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इन दोनों फलों में होने वाले एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है अंबिया बहार। संतरा और मौसंबी में अच्छी गुणवत्ता के फल प्राप्त करने के लिए बहार नियंत्रण किया जाता है। अंबिया बहार (अम्बे बहार) में फरवरी-मार्च के महीने में फूल आते हैं। इस पोस्ट के द्वारा हम संतरा और मौसंबी में अंबिया बहार के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी प्राप्त करेंगे।

संतरा और मौसंबी में अंबिया बहार की आवश्यकता | Ambia Bahar Necessity in Orange and Sweet Lime

संतरा और मौसंबी में वर्ष में 2-3 बार फूल आते हैं। अगर हर बार फूल आने पर फल प्राप्त किए जाये तो फलों की गुणवत्ता कम होने लगती है। जिससे किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। ऐसे में बहार प्रबंधन के द्वारा फलों को आने से रोका जाता है। जिससे अगली बार उच्च गुणवत्ता युक्त फल प्राप्त होते हैं।

बहार नियंत्रण करने के विभिन्न प्रकार | Various Methods of Controlling Ambia Bahar

  • जड़ों के पास की मिट्टी को निकाल कर: इस विधि में पौधों में सिंचाई नहीं की जाती है और तने के आस-पास की मिट्टी की ऊपरी सतह को निकाला जाता है। इससे जड़ों को धूप मिलती है। मिट्टी में नमी कम होने से पौधों की पत्तियां गिरने लगती हैं। करीब 20-25 दिनों बाद मिट्टी को वापस भर दिया जाता है।
  • सिंचाई बंद कर के बहार लेना: इस प्रक्रिया में पौधों में सिंचाई का कार्य बंद कर दिया जाता है। जिससे पौधों की पत्तियां गिरने लगती हैं। इस दौरान पौधे अपनी शाखाओं में पोषक तत्वों को भंडारित कर लेते हैं। सिंचाई बंद करने के बाद निराई-गुड़ाई करें इसके बाद खाद का प्रयोग करके सिंचाई करें। 25-30 दिनों बाद फूल आने लगते हैं।
  • शाकहों को झुका कर: पेड़ की सीधी शाखाओं में फल कम आते हैं। इसलिए इस प्रक्रिया में शाखाओं को नीचे की तरफ झुका कर बांध दिया जाता है। इसके बाद शाखाओं की ऊपर की पत्तियों को छोड़ कर छोटी टहनियों एवं पत्तियों की कटाई की जाती है। इस प्रक्रिया के 10-15 दिनों बाद नई टहनियां एवं पत्तियां निकलती हैं। जिसमें फूल-फल अधिक लगते हैं।

संतरा एवं मौसंबी में अंबिया बहार | Ambia Bahar in Orange and Sweet Lime

  • बीजों का उत्पन्न होना: संतरा में अंबिया बहार की प्रक्रिया अपनी शुरुआत बीजों के उत्पन्न होने से करती है। ये बीज पूर्ण रूप से परिपक्व होने पर संतरा के रूप में बदल जाते हैं।
  • एम्ब्रियोनिक डेवेलपमेंट: अंबिया बहार की प्रक्रिया की शुरुआत में, एम्ब्रियो विकसित होता है जो बीज के भीतर उत्पन्न होता है। इसमें संतरा के ऊतकपूर्ण अंशों का विकास होता है।
  • पौधों का निर्माण: एम्ब्रियो के विकास के बाद, एक नया पौधा बनता है जो संतरा के बीच बाहर निकलता है। इस पौधे में पत्तियां, फूल, और अन्य अंग विकसित होते हैं जो संतरा का पूर्ण स्वरूप बनाते हैं।
  • पौधों का विकास: संतरा के पौधों का विकास होता रहता है, जिसमें नए पत्ते, फूल, और फलों का विकास होता है।
  • बीजों का प्रसार: एक समय आता है जब फल में उत्पन्न हुए बीज बाहर निकलते हैं। इन बीजों का प्रसार होने पर नए संतरा पौधों का निर्माण होता है, जिससे यह प्रक्रिया फिर से शुरू होती है।
  • प्राकृतिक संतुलन: अंबिया बहार के द्वारा संतरा में प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। यह नए पौधों की संख्या को नियंत्रित रखता है और इसे प्राकृतिक रूप से बनाए रखता है।

संतरा एवं मौसंबी में अंबिया बहार के फायदे | Benefits of Ambia Bahar in Orange and Sweet Lime

  • आर्थिक लाभ: संतरा और मौसंबी के उत्पादन में वृद्धि अर्थात अंबिया बहार के कारण उनका उत्पादन बढ़ता है, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ होता है।
  • उच्च गुणवत्ता के फल: अंबिया बहार के माध्यम से संतरा और मौसंबी के फलों का संवर्धन होता है। इससे इन फलों के स्वाद, सुगंध और पोषण में वृद्धि होती है।
  • उपज में वृद्धि: इस प्रक्रिया से पुराने पेड़ों में बेहतर वानस्पतिक वृद्धि होती है, पौधों का बेहतर विकास होता है और पौधों में अधिक संख्या में फल लगते हैं।
  • प्राकृतिक वृद्धि का स्रोत: अंबिया बहार पौधों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो प्राकृतिक वृद्धि का मुख्य स्रोत है। इस प्रक्रिया से नए पौधों का निर्माण होता है।
  • वायुमंडल सुधार: अंबिया बहार के दौरान, पौधे अधिकतम ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अपने अंगों को बढ़ाते हैं जो वायुमंडल में अधिक ऑक्सीजन उत्पन्न करने में मदद करता है। इससे वायुमंडल की गुणवत्ता में सुधार होती है।
  • जैव विविधता का संरक्षण: अंबिया बहार से नए पौधे बनते हैं जो वन्यजीवों और पौधों की जैव विविधता को बनाए रखने में मदद करते हैं। यह जंगली क्षेत्रों को स्थायी रूप से बनाए रखने में मदद करता है और विभिन्न प्रजातियों को संरक्षित रखने का साधन बनता है।
  • जल संरक्षण: अंबिया बहार से नए पौधे उत्पन्न होते हैं जो जल संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण कारण बनते हैं। ये पौधे अपने रूचिरा निर्मित नहीं होते हैं और जल संचार को बढ़ाते हैं, जिससे स्थानीय जल स्रोतों को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

क्या आपने कभी संतरा और मौसंबी के पौधों में बहार प्रक्रिया को अपनाया है? अपने जवान एवं अनुभव हमें कमेंट के माध्यम से बताएं। यदि आपको यह जानकारी पसंद आई है तो इस पोस्ट को लाइक करें एवं इसे अन्य किसानों के साथ शेयर भी करें। जिससे अन्य किसान मित्र भी इस जानकारी का लाभ उठा सकें। इसके साथ ही कृषि संबंधी जानकारियों के लिए देहात के टोल फ्री नंबर 1800-1036-110 पर सम्पर्क करके विशेषज्ञों से परामर्श भी कर सकते हैं। इसके साथ ही इस पोस्ट को लाइक एवं कमेंट करना न भूलें। इस तरह की अधिक जानकारियों के लिए 'बागवानी फसलें' चैनल को तुरंत फॉलो करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | Frequently Asked Question

Q1: अम्बे बहार क्या है?

A1: फरवरी-मार्च महीने में पौधों में फूल प्राप्त करने के लिए फसलों में सिंचाई बंद करना एवं पौधों की कटाई-छंटाई को अम्बे बहार या अंबिया बहार कहा जाता है।

Q2: संतरे के पौधे में फूल कब आते हैं?

A2: संतरे में फरवरी-मार्च, जुलाई-अगस्त एवं अक्टूबर-नवंबर महीने में फूल आते हैं। फल कब आता है?

Q3: संतरे में फल कब आता है?

A3: अम्बे बहार के फल 270 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं। वहीं मृग बहार के फलों को पकने में करीब 240 दिनों का समय लगता है।

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