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धान
विभा कुमारी
कृषि विशेषयज्ञ
3 year
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धान की रोपाई के बाद उर्वरक प्रबंधन एवं खरपतवार नियंत्रण के सटीक उपाय

परिचय

  • धान की फसल में रोपाई के बाद जैविक एवं रासायनिक कई प्रकार के उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है।

  • फसल की बढ़वार और एक गुणवत्तापूर्ण फसल प्राप्ति में उर्वरकों के प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

  • अधिकतर धान की फसल में मुख्य रूप से चौड़ी पत्ती, संकरी पत्ती और मोथा कुल के खरपतवार पाए जाते हैं।

  • फसल में खरपतवार बढ़ने से कई प्रकार के रोग और कीटों का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके समाधान के लिए खरपतवार प्रबंधन अति आवश्यक है l

रोपाई के समय धान की फसल में उर्वरकों की मात्रा कितनी रखें ?

  • धान की बौनी किस्मों की रोपाई करते समय  40 किलोग्राम यूरिया का उपयोग प्रति एकड़ के अनुसार करें।

  • यूरिया के साथ 150 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट, 40 किलोग्राम म्यूरेट आफ पोटाश तथा 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट को खेत में मिलाएं।

  • बौनी किस्मों की रोपाई के लगभग 20 एवं 45 दिनों के अंतराल पर 35- 35 किलोग्राम यूरिया को खड़ी फसल में डालें।

  • धान की रोपाई के लगभग 20 से 25 दिनों के बाद 4 से 6 टन सड़ी गोबर की खाद खेत में मिलाएं।

  • धान की लंबी बढ़ने वाली किस्मों के लिए रोपाई के समय 75 किलो सिंगल सुपर फास्फेट तथा 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट का प्रयोग करें।

  • रोपाई के लगभग 20 और 45 दिनों के अंतर पर 38-38 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग करें।

  • यदि खेत में हरी खाद और गोबर की खाद का प्रयोग किया गया है तो प्रति एकड़ खेत के अनुसार 8 से 10 किलोग्राम नाइट्रोजन की मात्रा कम करें।

  • खेत में उर्वरक डालने से पहले मिट्टी की जांच अवश्य कराएं।

धान में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें ?

  • रोपाई के 48 से 72 घंटों के अंदर पर्याप्त नमी युक्त भूमि में प्रति हेक्टेयर के अनुसार 30 से 40 किलोग्राम ब्यूटाक्लोर 5 प्रतिशत या 15 किलोग्राम बेन्थियोकार्ब 10 प्रतिशत दवा के छिड़काव से चौड़ी पत्ती वाले विभिन्न घासों पर नियंत्रण प्राप्त कर सकते हैं।

  • रोपाई के 20-25 दिन बाद प्रति हेक्टेयर जमीन में 625 ग्राम 2 या 4-डी सोडियम साल्ट के प्रयोग से चौड़ी पत्ती वाले घासों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

  • पौध की खेत में रोपाई के बाद से 2-3 दिन बाद 1200 मिलीलीटर बूटाक्लोर 50 ई.सी. या 1200 मिलीलीटर थायोबैनकार्ब 50 ई.सी. या 1000 मिलीलीटर पेन्डीमिथालीन 30 ई.सी. या 600 मिलीलीटर प्रेटीलाक्लोर 50 ई.सी. नामक बूटीनाशकों का प्रयोग प्रति एकड़ की दर से करना चाहिए।

  • चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 30 ग्राम मैटसल्फरोन 20 डब्लयू पी को प्रति एकड़ के हिसाब से 150 लीटर पानी में मिलाकर रोपाई से 20-25 दिनों के बाद छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव करने से पहले खेत में रूके हुए पानी को निकाल दें और छिड़काव करने के एक दिन बाद खेत को फिर पानी  दें।

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धान की फसल में उचित खाद प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए अपनी फसल संबंधित सवाल आप हमें कमेंट बॉक्स में लिख कर भेज सकते हैं। यदि आपको आज के पोस्ट में दी गई जानकारी पसंद आई हो तो इसे लाइक करें और अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें। जिससे अधिक से अधिक किसान इस जानकारी का लाभ उठा सकें। साथ ही कृषि संबंधित ज्ञानवर्धक और रोचक जानकारियों के लिए जुड़े रहें देहात से।


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