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गिलोय की खेती से पहले जानें यह महत्वपूर्ण बातें

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गिलोय एक बहुत लाभदायक औषधीय पौधा है। इसके सेवन से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ती है। इसके साथ ही इसके सेवन से कई रोगों से छुटकारा मिलता है। पिछले कुछ वर्षों से गिलोय की मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसकी खेती करने वाले किसान कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। अगर आप भी करना चाहते हैं गिलोय की खेती तो इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां होना आवश्यक है। आइए इस विषय में विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

गिलोय के पौधों की कैसे करें पहचान?

  • गिलोय लताओं की तरह बढ़ने वाला पौधा है।

  • इसकी बेल हल्के पीले से सफेद रंग का होता है। बेल को हल्का छिलने पर अंदर का भाग हरे रंग का नजर आता है।

  • इसके पत्ते चिकने एवं पान के पत्तों की तरह नजर आते हैं।

  • इसके पुराने तने करीब 2 से 3 सेंटीमीटर व्यास तक मोटे होते हैं।

  • पतझड़ के मौसम में इसकी पत्तियां झड़ जाती हैं। वर्षा ऋतु में पौधों में नई पत्तियां निकल आती हैं।

  • गिलोय के कच्चे फल हरे रंग के होते है, जो पकने के बाद लाल रंग के हो जाते हैं।

खेती के लिए कितने कलम की आवश्यकता होती है?

  • पौधों की कटिंग यानी कलम की संख्या गिलोय के विभिन्न किस्मों पर निर्भर करता है।

  • सामान्यतौर पर प्रति एकड़ भूमि में खेती करने के लिए 1,000 से 2,000 कलम की आवश्यकता होती है।

रोपाई के लिए कलम तैयार करना

  • जुलाई-अगस्त महीने में कलम तैयार करें।

  • रोपाई के लिए 6 से 8 इंच की लम्बाई में कलम की कटाई करें।

  • कलम में 3 से 4 गांठें होनी चाहिए।

कलम की रोपाई का सही तरीका

  • कलम की रोपाई क्यारियों में करनी चाहिए।

  • सभी क्यारियों के बीच 1.5 से 2 मीटर की दूरी होनी चाहिए।

  • पौधों से पौधों के बीच करीब 50 सेंटीमीटर दूरी रखें।

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Pramod

Dehaat Expert

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11 October 2021

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