अदरक की खेती: बेहतर उपज के लिए सम्पूर्ण जानकारी (Ginger farming: Complete information for better yield)

अदरक (Ginger) एक मसालेदार फसल है, जो व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ औषधीय गुणों के लिए भी प्रसिद्ध है। इसकी खेती मुख्य रूप से ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, असम, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में की जाती है। अदरक की फसल गर्म और आर्द्र जलवायु में अच्छी पैदावार देती है, जिससे किसान बेहतर आय कमा सकते हैं। इसकी खेती में उन्नत तकनीक, सही बीज और सही प्रबंधन का विशेष महत्व है। अदरक की खेती की सम्पूर्ण और आसान जानकारी इस लेख में दी गई है।
कैसे करें अदरक के लिए खेत की तैयारी (How to prepare fields for ginger?)
- मिट्टी (Soil): अदरक की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतीली और लाल मिट्टी सबसे बेहतर होती है। मिट्टी का पीएच 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
- तापमान (Temperature): अदरक के लिए 12-35°C तापमान उपयुक्त माना जाता है।
- बुवाई का उचित समय (Sowing Time): बुवाई का सबसे उचित समय 15 मई से 30 मई के बीच होता है। उस खेत में अदरक की फसल न उगाएं, जहां पिछली बार अदरक की फसल ली गई हो। दक्षिण भारत में अदरक की बुवाई मानसून फसल के रूप में अप्रैल-मई में होती है। मध्य और उत्तर भारत में इसे शुष्क क्षेत्र फसल के रूप में अप्रैल से जून तक बोया जा सकता है। सबसे उपयुक्त समय 15 मई से 30 मई है। 15 जून के बाद बुवाई करने पर कंद सड़ने लगते हैं और अंकुरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है। केरल में अप्रैल के पहले सप्ताह में बुवाई करने पर उपज 200 प्रतिशत तक अधिक पाई गई है। सिंचाई क्षेत्रों में सबसे अधिक उपज फरवरी के मध्य बोने पर मिलती है। पहाड़ी क्षेत्रों में 15 मार्च के आसपास बुवाई करने पर सबसे अच्छा उत्पादन होता है।
- खेत की तैयारी (Field Preparation): खेत की जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद धूप लगने के लिए छोड़ दें। मानसून से पहले खेत की 2-3 बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लें। इसके बाद खेत में गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालें। अंत में भूमि को समतल कर लें।
- उन्नत किस्में (Improved Varieties): सुप्रभा, सुरभि, नदिया, अथिरा जैसी उन्नत किस्मों के अलावा मरान, जोरहट, सुरुचि, महिमा, वारदा, हिमगिरी, रेजाठा आदि किस्मों की खेती प्रमुखता से की जाती है।
- बुवाई (Planting): बुवाई के लिए पंक्तियों की दूरी 15-20 से.मी. और पौधों की दूरी 22.5 सें.मी. होनी चाहिए। बीज की गहराई 4-5 सें.मी. तक रखें। अदरक की बुवाई सीधे ढंग से या पनीरी लगाकर की जा सकती है।
- बीज की मात्रा (Seed Quantity): बुवाई के लिए ताजा और बीमार रहित गांठों का प्रयोग करें। प्रति एकड़ 480-720 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
- बीज का उपचार (Seed Treatment): बुवाई से पहले गांठों को मैनकोज़ेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में 30 मिनट तक भिगोकर उपचारित करें। इसके बाद गांठों को 3-4 घंटे के लिए छांव में सुखाएं। यह प्रक्रिया गांठों को फफूंदी से बचाने में मदद करती है।
- खाद और उर्वरक (Fertilizers): खेत की तैयारी के समय मिट्टी में 150 क्विंटल प्रति एकड़ गोबर की खाद, सल्फर 10 किग्रा, और स्टार्टर (माइकोराइजा/जैव उर्वरक) 4 किग्रा डालें। 55 किलो यूरिया, 60 किलो सिंगल सुपर फास्फेट और 16 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश का उपयोग करें। पोटाश और फास्फोरस की पूरी मात्रा बुवाई के समय डालें। नाइट्रोजन को दो हिस्सों में बांटकर बुवाई के 75 दिन और 3 महीने बाद डालें।
- सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management): अदरक की सिंचाई वर्षा की तीव्रता और आवृत्ति को ध्यान में रखते हुए करें। फसल की बुवाई के तुरंत बाद खेत को 50 क्विंटल प्रति एकड़ हरे पत्तों से ढक दें। प्रत्येक बार खाद डालने के बाद, फसल को फिर से 20 क्विंटल प्रति एकड़ हरे पत्तों से ढकें। इससे मिट्टी की उर्वरता और नमी बनाए रखने में मदद मिलती है।
- खरपतवार प्रबंधन (Weed Management): अदरक की खेती में खरपतवार प्रबंधन बेहद जरूरी है। बुवाई के बाद पलवार बिछाएं ताकि अंकुरण अच्छा हो और खरपतवार कम निकलें। खरपतवार होने पर निराई-गुड़ाई करें। पहली निराई-गुड़ाई के बाद हर 25 दिन पर दो से तीन बार यह प्रक्रिया करें। जड़ों पर मिट्टी चढ़ाएं और खुरपी की सहायता से कल्ले निकाल दें।
- अदरक के रोग और कीट प्रबंधन (Diseases and Pest Management): अदरक में प्रकंद सड़न, पत्ती धब्बा रोग, और एंथ्राक्नोस प्रमुख रोग होते हैं। ये रोग फसल की पत्तियों और तनों को प्रभावित करते हैं, जिससे पौधे मुरझा सकते हैं। इन रोगों को रोकने के लिए प्रभावित पौधों को तुरंत हटा दें और रोग नाशक दवाओं का छिड़काव करें। प्रमुख कीटों में पौधे की मक्खी, तना का कीट, और रस चूसने वाले कीड़े शामिल हैं। इन कीटों को नियंत्रित करने के लिए कीटनाशक का उपयोग करें। फसल को नियमित रूप से निरीक्षण करें और आवश्यकतानुसार कीटनाशकों का छिड़काव करें।
- कटाई (Harvesting): अदरक की फसल 8 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। मसाले के लिए 6 महीने बाद और नए उत्पादों के लिए 8 महीने बाद कटाई करें। जब पत्तियां पीली होकर सूखने लगें, तब कटाई करें। गांठों को उखाड़कर 2-3 बार पानी से धोकर साफ करें और 2-3 दिन छांव में सुखाएं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | Frequently Asked Questions (FAQs)
Q: अदरक की खेती कौन से महीने में लगाई जाती है?
A: अदरक की खेती के लिए सही समय का चयन महत्वपूर्ण है। वर्षा सिंचित क्षेत्रों में, यह मई के पहले सप्ताह में लगाई जाती है ताकि पौधों को मानसून की पहली बारिश का लाभ मिल सके। सिंचित क्षेत्रों में, फरवरी से मार्च के दूसरे सप्ताह तक खेती करना उचित होता है, क्योंकि इस समय पौधों को पर्याप्त पानी और अनुकूल तापमान मिलता है।
Q: अदरक को जमीन पर कैसे लगाएं?
A: अदरक की खेती के लिए एक बार मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करने के बाद, चार बार देशी हल या कल्टीवेटर से जुताई करते हैं। प्रत्येक जुताई के बाद पाटा अवश्य लगाना चाहिए। जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाए। अंतिम जुताई से 3 से 4 सप्ताह पूर्व खेत में 250 से 300 क्विंटल सड़ा हुआ गोबर का खाद देते है।
Q: एक एकड़ में कितना अदरक पैदा होता है?
A: एक एकड़ भूमि में 60-80 क्विंटल अदरक पैदा होती है। उत्पादकता बीज की गुणवत्ता, मिट्टी की उर्वरता, सिंचाई और देखभाल की विधियों पर निर्भर करती है। आधुनिक कृषि तकनीकों का पालन करने से उपज में वृद्धि हो सकती है।
Q: अदरक को अंकुरित होने में कितने दिन लगते हैं?
A: अदरक को अंकुरित होने में लगभग 25 दिन लगते हैं। अंकुरण की अवधि मिट्टी की नमी, तापमान और बीज की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। आदर्श तापमान और नमी मिलने पर अदरक के बीज तेजी से अंकुरित होते हैं।
Q: अदरक कितने महीने की होती है?
A: अदरक की फसल 8 से 9 महीने में पूरी तरह से तैयार हो जाती है। फसल की परिपक्वता की अवधि किस्म और जलवायु परिस्थितियों पर निर्भर करती है। सही समय पर फसल काटने से उसकी गुणवत्ता और बाजार मूल्य में वृद्धि होती है।
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