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संतरे में फसल की सुरक्षा के लिए उपयोगी टिप्स और ट्रिक्स

संतरा हर मौसम का फल है लेकिन अप्रैल के अंत, मई की शुरुआत और दिसंबर के दौरान बहुतायत से उगता है। संतरे की खेती एक लाभकारी कृषि व्यापार है। लेकिन इसके लिए संतरे के पौधों की देखभाल को सही तरीके से करना महत्वपूर्ण है, ताकि पौधे स्वस्थ रूप से विकसित हो सके और अधिक फल दे सके। तो आइये जानते हैं संतरे की खेती के कुछ तरीके जिससे अधिक मात्रा में फलो का उत्पादन किए जा सकता है।

पौधों की सुरक्षा: संतरे के पौधों की सुरक्षा के लिए उचित निगरानी और देखभाल करें। नियमित रूप से पौधों की स्थिति की जांच करें और संकेतों की निगरानी करें।

समय पर प्रुनिंग: संतरे के पौधों को समय-समय पर प्रून करें, जिससे पौधों को सही मात्रा में सूरज की रोशनी प्राप्त हो सके।

फसल की सिंचाई: संतरे के पौधों में नियमित रूप से सिंचाई करते रहें, वहीं जरूरत से अधिक सिंचाई से बचें।

खाद्य प्रबंधन

  1. फसल को नियमित रूप से खाद्य सामग्री से पोषित करें ताकि पौधों की वृद्धि होती रहे और पौधों की सुरक्षा मजबूत बनी रहे।
  2. एक-प्रकार की खाद सामग्री की बजाय, आपको मिश्रित खाद सामग्री का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि यह पौधों को विभिन्न पोषण प्रदान कर सकता है।
  3. फसल की विकास चरण के आधार पर पोषण की मात्रा बदलें, जैसे कि वानस्पतिक विकास चरण, फूलों के उत्पादन चरण, और फल पकने का चरण।
  4. अधिक खाद उपयोग से पौधों को नुकसान हो सकता है। खाद की अधिक मात्रा से अतिरिक्त फसलों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

पोषण की गणना: पौधों को पोषण की गणना करने के लिए पौधों की पत्तियों का परीक्षण करें। यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि पौधों को उनकी आवश्यकता के हिसाब से ही पोषण मिल रहा है।

रोग और कीट प्रबंधन: फसल को संरक्षण के लिए रोग और कीट प्रबंधन का उपयोग करें। कीट प्रबंधन के लिए जैविक और रासायनिक उपायों का उपयोग कर सकते हैं। आइये जानते हैं, संतरे में लगने वाले कुछ प्रमुख रोग/कीट और उनका प्रबंधन।

  1. कैंकर- यह सामान्यत: खट्टे फलों पर लगने वाला एक है। रोग के प्रभाव में पत्तों, टहनियों और फलों पर गहरे रंग के खुरदरे धब्बे पड़ जाते हैं। संतरे की फसल में कैंकर रोग से बचाव के लिए कासुगामाइसिन 50%+ कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 45% डब्ल्यूपी का प्रयोग 1.5 से 2 ग्राम प्रति लीटर की दर से प्रयोग करें।
  2. साइट्रस साइला- साइला कीट एक चिपचिपे पदार्थ का उत्सर्जन करता है, इसके साथ ही पत्तियों की उभरी हुई ऊपरी परत एवं अंदर की ओर धंसी निचली परत से यह पौधों पर आसानी से पहचाना जा सकता है। कीट के नियंत्रण के लिए थायामेथोक्साम 25% डब्लूजी का इस्तेमाल 40 ग्राम प्रति एकड़ की दर से करें।
  3. एंथ्रेक्नोज- यह एक फफूंदजनक रोग है। इस रोग में टहनियां और पत्तियां सूख कर गिरने लगती है। रोग से नियंत्रण के लिए एज़ोक्सीस्ट्रोबिन 11%+ टेबुकोनाज़ोल 18.3% एससी (देहात एजीटॉप) का प्रयोग 2 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से करें।
  4. लीफ माइनर- लीफ माइनरछोटे भूरे रंग के कीट होते हैं,। ये कीट पत्तियों पर अंडे देते हैं, जिसके बाद कीट के लार्वा से पत्तियों के ऊतकों में सुरंग बनाते हैं और पौधे की आंतरिक कोशिकाओं को खा जाते हैं। लीफ माइनर कीट पर नियंत्रण के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 8.8 + थायोमेथोक्जाम 17.5 एससी 150 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।

संतरों की सुरक्षा के लिए ये टिप्स और ट्रिक्स आपके फसल को स्वस्थ और सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं। खेती से जुड़ी ऐसी ही आगे आने वाली जानकारी के लिए जुड़े रहें देहात के साथ।

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