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कृषि ज्ञान
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यह रोग बाजरे की खेती करने वाले किसानों की जेब पर पड़ सकता है भारी

अरगट रोग एक कवक जनित रोग है। इसके कवक मिट्टी में लम्बे समय तक जीवित रहते हैं। इस रोग से पौधों की बालियां सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। फलस्वरूप बाजरे की उपज में कमी किसानों की जेब पर भारी पड़ती है। हालांकि कुछ सामान्य बातों पर अमल करके हम फसल को इस रोग की चपेट में आने से बचा सकते हैं। खड़ी फसल में अरगट रोग के लक्षण एवं नियंत्रण के तरीके निम्नलिखित हैं।

बाजरा की फसल में अरगट रोग से होने वाले नुकसान

  • अरगट रोग होने पर पौधों से गुलाबी रंग का चिपचिपा गाढ़ा पदार्थ निकलने लगता है।

  • कुछ समय बाद यह चिपचिपा पदार्थ गहरे भूरे रंग में बदलने लगता है।

  • रोग का प्रकोप बढ़ने पर बाजरे की बालियों में दानों की जगह गहरे भूरे से काले रंग के चिपचिपे एवं जहरीले पिंड बन जाते हैं।

बाजरे की फसल को अरगट रोग से बचाने के तरीके

  • यदि पिछली फसल में अरगट रोग का प्रकोप देखा गया है तो उस खेत में दुबारा बाजरे की खेती करने से बचें।

  • फसल की बुवाई से पहले खेत में गहरी जुताई करें। इससे मिट्टी में मौजूद रोग के जीवाणु धूप की गर्मी से नष्ट हो जाएंगे।

  • उपयुक्त फसल चक्र अपनाएं।

  • खरपतवारों को खेत में पनपने से रोकें।

अरगट रोग पर कैसे करें नियंत्रण?

  • बाजरे की फसल को इस रोग से बचाने के लिए बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज को 2.5 ग्राम थीरम 75% डबल्यूएस से उपचारित करें।

  • रोग को फैलने से रोकने के लिए प्रभावित बालियों को पौधों से अलग करके नष्ट करें।

  • खड़ी फसल में रोग के लक्षण नजर आने पर 200 लीटर पानी में प्रोपिकानाज़ोल 25% ईसी मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

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इस पोस्ट में बताई गई बातों पर अमल कर के आप बाजरे की फसल को अरगट रोग से बचा सकते हैं। बाजरा की खेती से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप हमारे टोल फ्री नंबर 1800-1036-110 पर संपर्क करके कृषि विशेषज्ञों से निःशुल्क परामर्श कर सकते हैं। इससे सम्बंधित अपने सवाल बेझिझक हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें। इसके साथ ही आप हाइपरलोकल सुविधा के द्वारा देहात उत्पादों को घर तक प्राप्त कर सकते हैं।

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