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आपके पशुओं के लिए जानलेवा न बन जाए दूध ज्वर रोग

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दूध ज्वर रोग यानी मिल्क फीवर से केवल गाय-भैंस ही नहीं, बकरी भी प्रभावित होती है। उचित इलाज नहीं मिलने पर पशुओं के लिए यह रोग जानलेवा साबित हो सकती है। बात करें इस रोग के कारणों की तो रक्त में कैल्शियम की कमी दूध ज्वर रोग का सबसे कारण है। कोलस्ट्रम में रक्त से 12-13 गुना अधिक कैल्शियम होता है। प्रसव के बाद कोलेस्ट्रम के साथ अधिक मात्रा में कैल्शियम शरीर से बाहर आ जाता है और पशुओं को संतुलित आहार नहीं मिलने पर उनके शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है। इसके अलावा पशुओं के आहार की मात्रा एवं गुणवत्ता में अचानक बदलाव होने से भी इस रोग का खतरा बढ़ जाता है।

पशुओं को होने वाले दूध ज्वर रोग की 3 अवस्थाएं होती हैं। हमारे पशु विशेषज्ञों ने इस रोग की सभी अवस्थाओं के लक्षण एवं बचाव की जानकारी दी है।

दूध ज्वर रोग की पहली अवस्था के लक्षण

  • इस अवस्था में पशुओं में टेटनस के लक्षण नजर आते हैं।

  • पशु अधिक संवेदनशील एवं उत्तेजित हो जाते हैं।

  • पशु खाना-पीना बंद कर देते हैं और जीभ बाहर निकाल कर बैठे रहते हैं।

  • पहली अवस्था में पशु दांत किटकिटाने लगते हैं और उनका शारीरिक तापमान समान्य से थोड़ा अधिक हो जाता है।

  • पिछले पैरों एवं शरीर में अकड़न होने लगता है।

  • कई बार पशु आंशिक लकवा के कारण गिरने लगते हैं।

दूध ज्वर रोग की दूसरी अवस्था के लक्षण

  • इस अवस्था में पशुओं को उठने एवं खड़े रहने में कठिनाई होती है। इसलिए ज्यादातर समय पशु अपने गर्दन को मोड़कर बैठे रहते हैं।

  • पशुओं का शारीरिक तापमान सामान्य से कम होने लगता है और पैर एवं शरीर ठंडे हो जाते हैं।

  • आंखों की पुतली फैल जाती है और आंखों में सूजन हो जाती है।

  • प्रभावित पशु पलकें झपकना बंद कर देते हैं।

  • आमाशय की गति धीमी होने से कब्ज की समस्या होने लगती है।

  • मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं।

  • हृदय की ध्वनि धीमी हो जाती है और हृदय गति बढ़ कर प्रति मिनट 60 तक हो सकती है।

  • रक्तचाप कम होने की शिकायत होती है।

दूध ज्वर रोग की तीसरी अवस्था के लक्षण

  • इस अवस्था में पशु बेहोशी की हालत में आ जाते हैं और ज्यादातर समय फर्श पर लेटे रहते हैं।

  • शारीरिक तापमान कम होने से पशुओं के पैर एवं शरीर ठंडे हो जाते हैं।

  • पशुओं की हृदय गति बढ़ कर प्रति मिनट 120 तक हो जाती है और हृदय की ध्वनि सुनाई नहीं देती है।

  • मांसपेशियों में लकवा हो जाता है।

  • अधिक समय तक बैठे रहने के कारण आफरा रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

पशुओं को दूध ज्वर रोग से बचाने के तरीके

  • पशु चिकित्सक की परामर्श के अनुसार प्रसव से 3 महीने पहले से पशुओं के आहार में कैल्शियम एवं फास्फोरस की मात्रा बढ़ाएं।

  • कैल्शियम की कमी दूर करने के लिए पशुओं के आहार में प्रतिदिन 100 मिलीलीटर 'देहात वेटनोकल गोल्ड' शामिल करें।

  • पशुओं के आहार में सूखी घास एवं चारा भी शामिल करें।

  • प्रसव के बाद पशुओं को संतुलित आहार का सेवन कराएं।

  • इस रोग के लक्षण नजर आते ही पशु चिकित्सक से परामर्श करें।

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SomnathGharami

Dehaat Expert

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16 November 2022

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