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21 Mar
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एक्वापोनिक्स खेती: जानें प्रक्रिया एवं लाभ | Aquaponics Farming: Process and Benefits

वर्तमान में लगभग हर क्षेत्र में आए दिन नई तकनीकें ईजाद की जा रही हैं। कृषि जगत भी इससे कहीं अछूता नहीं है जिसमें कई अनोखे आविष्कार किए जा रहे हैं। इन आविष्कारों में एक्वापोनिक्स कृषि भी शामिल है। आने वाले कुछ वर्षों में बढ़ती जनसंख्या से कृषि योग्य भूमि की कमी और घटता जल स्तर के कारण सिंचाई के लिए पानी की कमी होना कृषि क्षेत्र में एक बड़ी समस्या बन कर उभर सकती है। ऐसे में एक्वापोनिक्स कृषि तकनीक एक बड़ी राहत बन सकती है। एक्वापोनिक्स खेती के माध्यम से कम जगह में मछली पालन के साथ सब्जियों की भी खेती की जा सकती है। आइए इस पोस्ट के माध्यम से जानते हैं एक्वापोनिक्स खेती की विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

क्या है एक्वापोनिक्स? | What is Aquaponics?

  • एक्वाकल्चर और हाइड्रोपोनिक्स को मिलाकर एक एक्वापोनिक्स की शुरुआत की गई है।
  • इस तकनीक के माध्यम से मछली पालन के साथ पानी में सब्जियां भी उगाई जाती हैं।

एक्वापोनिक्स कृषि कैसे की जाती है? | How is aquaponics done?

  • इस प्रक्रिया में एक बड़े टैंक या तालाब में मछलियां पाली जाती हैं।
  • मछलियों के मल से पानी में अमोनिया की मात्रा बढ़ती है।
  • इस पानी को सब्जियों के टैंक में डाला जाता है। जिससे पौधों में आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति होती है।
  • पौधों के द्वारा पोषक तत्व ग्रहण करने के बाद पानी को फिर से मछलियों के टैंक में डाल दिया जाता है।
  • यह प्रक्रिया चलती रहती है।

एक्वापोनिक्स तकनीक से किन पौधों की खेती की जा सकती है? | Which plants can be cultivated using aquaponics method?

एक्वापोनिक्स तकनीक से पत्ते वाली सब्जियों के साथ टमाटर, खीरा, मिर्च, स्ट्रॉबेरी, लेट्यूस, केल, पालक, तुलसी, पुदीना एवं अन्य जड़ी-बूटी (हर्ब्स) की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है।

एक्वापोनिक्स खेती के फायदे | Benefits of Aquaponics

  • पानी की बचत: केवल पानी में खेती होने के बाद भी पारम्परिक कृषि की तुलना में एक्वापोनिक्स खेती में 90% कम पानी का उपयोग होता है। पानी की बचत होने के कारण पानी की कमी वाले क्षेत्रों में भी इस तकनीक से कृषि संभव है।
  • अधिक उपज: एक्वापोनिक तकनीक से फसलों को उगाने से पैदावार में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होती है।
  • अतिरिक्त आय: इस तकनीक के द्वारा पौधों को उगाने के साथ मत्स्य पालन भी किया जाता है। जिससे किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।
  • उर्वरकों की आवश्यकता: मछलियों के पानी में अमोनिया की मात्रा अधिक होती है। पौधे पानी से आवश्यक पोषक तत्वों को ग्रहण कर लेते हैं, जिससे पारंपरिक खेती की तुलना में खाद एवं उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है।
  • गुणवत्ता में वृद्धि: इस विधि से खेती करने पर उच्च गुणवत्ता की फसल प्राप्त होती है। पौधे स्वस्थ रहते हैं और अधिक पौष्टिक उपज प्राप्त होती है।
  • कृषि योग्य भूमि की आवश्यकता: इस तकनीक के माध्यम से कृषि के लिए अनुपयोगी भूमि में भी सफलतापूर्वक खेती की जा सकती है। लवणीय भूमि, मरुस्थल, रेतीली भूमि, आदि में भी आसानी से एक्वापोनिक्स खेती की जा सकती है।
  • वर्ष भर उत्पादन: एक्वापोनिक्स सिस्टम को घर के अंदर या ग्रीनहाउस में स्थापित कर के वातावरण को नियंत्रित किया जा सकता है। जिससे प्रतिकूल मौसम में भी वर्ष भर पौधों को उगाया जा सकता है।
  • रोग एवं कीटों के प्रकोप में कमी: इस तकनीक से पौधों को उगने पर उनमें रोग एवं कीटों के प्रकोप की संभावना कम हो जाती है। इसके साथ ही खरपतवारों की समस्या भी नहीं होती है।

एक्वापोनिक्स खेती के नुकसान | Challenges of Aquaponics Farming

  • लागत में वृद्धि: एक्वापोनिक्स सिस्टम को स्थापित करने में लागत की आवश्यकता अधिक होती है।  इसके अलावा छोटी दुर्घटना होने पर भी पूरा तंत्र खराब हो सकता है। पंप, हीटर एवं अन्य उपकरणों के लिए बिजली की आवश्यकता होती है। जिससे कृषि की लागत बढ़ सकती है।
  • तकनीकी जानकारी की कमी: मछली पालन, बैक्टेरिया और पौधों की जानकारी नहीं होने से नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
  • सिमित फसलों की खेती: इस तकनीक के द्वारा सभी फसलों की खेती संभव नहीं है। किसान केवल पत्तेदार सब्जियों और कुछ छोटे पौधों वाली सब्जियों की ही खेती कर सकते हैं।
  • बिजली पर निर्भरता: सर्किट, मोटर आदि को चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है। बिजली की कमी वाले क्षेत्रों में इस तकनीक का उपयोग करना एक कठिन कार्य है।

भारत में कहां होती है एक्वापोनिक खेती? | Where in India is Aquaponic Farming Practiced?

  • कोच्चि के पास एक छोटा सा गांव है चेराई। इस गांव को देश का पहला एक्वापोनिक गांव होने का गौरव प्राप्त है। यहां वर्ष 2016 से एक्वापोनिक खेती की जाती है।
  • वहीं बंगलुरु का माधवी फार्म्स देश का पहला और सबसे बड़ा एक्वापोनिक फार्म है।
  • अब देश के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता पूर्वक एक्वापोनिक खेती की जा रही है।

क्या आपने एक्वापोनिक्स तकनीक के द्वारा फसलों को उगाया है? अपने जवाब हमें कमेंट के माध्यम से बताएं। कृषि क्षेत्र की आधुनिक तकनीकों की अधिक जानकारी के लिए ‘कृषि टेक’ चैनल को तुरंत फॉलो करें। इसके साथ ही इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | Frequently Asked Question (FAQs)

Q: हाइड्रोपोनिक और एक्वापोनिक में क्या अंतर है?

A: हाइड्रोपोनिक और एक्वापोनिक दोनों ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा बिना मिट्टी के, केवल पानी में ही पौधे तैयार किए जाते हैं। हाइड्रोपोनिक खेती में पानी में पोषक तत्वों को मिला कर पौधों तक पहुंचाया जाता है। वहीं एक्वापोनिक तकनीक में पानी में पौधों को उगाने के साथ मछली पालन भी किया जाता है। मछली के अपशिष्ट से पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं।

Q: एक्वापोनिक्स फार्म शुरू करने में कितना खर्च आता है?

A: पारम्परिक खेती की तुलना में एक्वापोनिक्स खेती में लागत अधिक होती है। एक्वापोनिक्स फार्म स्थापित करने की लागत अधिक होने के कारण इसका चलन कम है और छोटे किसान इस तकनीक का उपयोग नहीं कर पाते हैं। एक्वापोनिक्स फार्म शुरू करने में 5,00,000 से 15,00,000 रुपए तक की लागत हो सकती है। इसकी लागत इसके आकार पर निर्भर करती है। हालांकि, इस प्रक्रिया को अपनाने से कुछ वर्षों बाद इससे मुनाफा भी दुगना हो सकता है।

Q: एक्वापोनिक्स खेती क्या है?

A: एक्वापोनिक्स खेती एक आधुनिक कृषि प्रणाली है जिसके तहत मिट्टी के बगैर पौधों को उगाया जाता है और साथ में मछली पालन भी किया जाता है। इस प्रक्रिया में मछलियों के पानी को पौधों में डाला जाता है और इसकी कुछ दिनों बाद पौधों के पानी को फिल्टर करके वापस मछलियों के टैंक में डाला जाता है। इससे पानी की बचत होती है। इस विधि से खेती करने के लिए किसानों को कृषि योग्य भूमि की भी आवश्यकता नहीं होती है।

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