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15 Mar
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गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली फसलें | Crops Grown in Summer Season

गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली फसलें | Crops Grown in Summer Season

गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली फसलें | Crops Grown in Summer Season

कृषि प्रधान देश होने के कारण भारत के कारण एक बड़ा तबका जीवनयापन के लिए कृषि पर निर्भर है। हमारे देश में मुख्यतः रबी और खरीफ मौसम में खेती की जाती है। लेकिन कई ऐसी फसलें हैं जिनकी खेती गर्मी के मौसम में की जाती है। रबी फसलों की कटाई के बाद और खरीफ फसलों की बुवाई से पहले 2-3 महीने का समय होता है। ऐसे में आप ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई करके अतिरिक्त मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। आइए इस पोस्ट के माध्यम से हम गर्मी के मौसम में खेती की जाने वाली फसलों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली कुछ बेहतरीन फसलें | Best Crops grown in summer season

  • मक्का: गर्मी के मौसम में मक्का की खेती के लिए जानवरी से मार्च तक का समय उपयुक्त है। मक्का की खेती बालुई मिट्टी से ले कर भारी चिकनी मिट्टी में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। लेकिन इसकी अच्छी उपज के लिए दोमट मिट्टी का चयन करें। मिट्टी का पी.एच. स्तर 6.0 से 7.0 तक होना चाहिए। बेहतर फसल के लिए खेत में जल जमाव की स्थिति उत्पन्न न होने दें।
  • मूंग: इस समय आप अपनी खेत में मूंग की खेती कर सकते हैं। मूंग की खेती के लिए दोमट मिट्टी और बलुई दोमट भूमि सर्वोत्तम हैl ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई के लिए मार्च के दूसरे सप्ताह से ले कर अप्रैल मध्य तक का समय उपयुक्त है। गर्मी के मौसम में खेती करने पर प्रति एकड़ खेत में 10 से 12 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। इसकी खेती से अतिरिक्त कमाई भी होगी और मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी बढ़ती है।
  • उड़द: उड़द की खेती के लिए गर्मी का मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है। करीब 30 से 40 डिग्री तापमान में पौधों का विकास बेहतर होता है। फसल की अवधि इसकी किस्मों पर निर्भर करती है। सामान्यतः फसल को तैयार होने में करीब 122-125 दिनों का समय लगता है। इसकी जल्दी पकने वाली कुछ किस्में 75 दिनों में तैयार हो जाती हैं। पौधों के उचित विकास के लिए इसकी खेती बलुई दोमट मिट्टी में करें।
  • अरहर: दलहनी फसलों में अरहर की खेती प्रमुखता से की जाती है। शाकाहारी भोजन में प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत होने के कारण इसकी मांग सभी मौसम में बनी रहती है। इसकी खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा होता है। अम्लीय एवं क्षारीय मिट्टी को छोड़ कर इसकी खेती लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में सफलतापूर्वक की जा सकती है। इसकी बुवाई जून-जुलाई महीने में अधिक होती है। लेकिन गर्मी के मौसम में भी इसकी खेती की जा सकती है। अरहर की फसल नाइट्रोजन को भूमि में एकत्र करने में सहायक है, जिससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता में भी सुधार होता है।
  • सूरजमुखी: हमारे देश में तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में सूरजमुखी की खेती प्रमुखता से की जाती है। इसके बीज में 45 से 50 प्रतिशत तक तेल की मात्रा होती है। सूरजमुखी की खेती वर्ष में 3 बार की जा सकती है लेकिन इसकी बुवाई करने के लिए फरवरी से मध्य मार्च तक का समय सर्वोत्तम है। बुवाई के 70 से 80 दिनों में इसकी फसल तैयार हो जाती है। फसल जल्दी तैयार होने के कारण इसकी कटाई के बाद आप खरीफ फसलों की बुवाई कर सकते हैं। जब फूलों का पिछला हिस्सा नींबू की तरह पीले रंग का हो जाए और फूल झड़ने लग जाएं तब इसकी कटाई कर लेनी चाहिए।
  • जूट: अधिक मुनाफा देने वाली फसलों में शामिल होने के कारण जूट नकदी फसलों में शामिल है है। भारत में बंगाल, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, बिहार और असम में इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इसकी बुवाई के लिए फरवरी-मार्च का महीना उपयुक्त है। ऊंचे क्षेत्रों में इसकी बुवाई मार्च से जुलाई महीने तक की जा सकती है। गर्म और आर्द्र जलवायु इसकी खेती के लिए उपयुक्त है। पौधों के विकास के लिए 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान की आवश्यकता होती है।
  • गन्ना: ग्रीष्मकालीन गन्ने की फसल की बुवाई फरवरी से मार्च महीने में की जाती है। उत्तर भारतीय क्षेत्रों में अप्रैल महीने में भी इसकी पछेती बुवाई की जा सकती है। बीज के जमाव के लिए 26 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त है। इसकी खेती के लिए अच्छी जल निकासी युक्त दोमट मिट्टी, चिकनी दोमट मिट्टी या काली भारी मिट्टी का चयन करें। बुवाई के लिए रोग रहित गन्ने की फसल से बीज का प्रयोग करें। यह एक लम्बी अवधि की फसल है और एक बार इसकी बुवाई कर के मुख्य फसल और पेड़ी गन्ना के रूप में 2 बार फसल प्राप्त किया जा सकता है।
  • सनई: सनई एक चारे वाली फसल है। इसकी खेती हरी खाद के लिए भी की जाती है। भारत में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, राज्यस्थान, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में इसकी खेती की जाती है। इसकी खेती के लिए गर्म नम जलवायु उपयुक्त होती है। सिंचित क्षेत्रों में इसकी बुवाई अप्रैल-मई महीने में की जा सकती है। असिंचित क्षेत्रों में पहली वर्षा के बाद इसकी बुवाई की जाती है। दलहनी कुल की फसल होने के कारण इसमें नाइट्रोजन की आवश्यक भी कम होती है। इसके साथ सनई के पौधों में रोग एवं कीटों का प्रकोप भी बहुत कम होता है।

गर्मी के मौसम में आप किन फसलों की खेती करते हैं और इससे आपको कितना मुनाफा होता है? अपने जवाब एवं अनुभव हमें कमेंट के माध्यम से बताएं। इस तरह की अधिक जानकारियों के लिए 'कृषि ज्ञान' चैनल को फॉलो करें। इसके साथ ही इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | Frequently Asked Question (FAQs)

Q: गर्मी के मौसम में कौन सी फसल अच्छी होती है?

A: गर्मी के मौसम में मूंग, उड़द, लोबिया, सूरजमुखी, जैसी फसलों के साथ टमाटर, भिंडी, बैंगन, खीरा, जैसी सब्जियों की भी खेती की जा सकती है।

Q: मार्च अप्रैल में कौन सी फसल बोई जाती है?

A: मार्च-अप्रैल में लौकी, भिंडी, करेला, खीरा, बैंगन जैसी फसलों की बुवाई कर सकते हैं।

Q: गर्मियों में उड़द की खेती कैसे करें?

A: उड़द एक गर्म मौसम की फसल है जिसकी खेती भारत में गर्मियों के दौरान की जा सकती है। पौधों के बेहतर विकास के लिए इसकी खेती 6.0 से 7.5 पीएच स्तर की मिट्टी और 25-35 डिग्री सेल्सियस तापमान में करें। खेत में अच्छी जल निकासी की व्यवस्था करें। बीज की बुवाई करीब 2-3 सेंटीमीटर की गहराई पर करें। सभी पंक्तियों के बीच 10 से 15 सेंटीमीटर की दूरी रखें। अच्छी उपज के लिए समय पर सिंचाई, उचित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग, खरपतवार प्रबंधन के साथ रोग एवं कीटों पर नियंत्रण करना जरूरी है।

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