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25 Apr
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पत्तागोभी: कीट, लक्षण, बचाव एवं उपचार (Cabbage: pests, symptoms, prevention and treatment)


सब्जियों में पत्तागोभी एक लोकप्रिय फसल है। पत्तागोभी की खेती बिहार, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, आसाम, हरियाणा और महाराष्ट्र में की जाती है। इसकी खेती वैसे तो रबी, खरीफ और जायद तीनों में कर सकते हैं पर यह रबी सीजन में ज्यादा लगाई जाती है। पत्तागोभी की सब्जी में कीटों की समस्या ज्यादातर देखने को मिलती हैं।

पत्तागोभी के कीटों पर नियंत्रण कैसे करें? (How to control the pests of Cabbage?)

  • माहू कीट : माहू छोटे-छोटे आकार के कीट होते है, यह गोभी के पौधों के कोमल हिस्सों जैसे - तना, पत्तियाँ, फूल और बनने वाली नयी फलियों से रस चूस कर फसल को हानि पहुंचाते हैं एवं यह पौधे पर रास चूसने के बाद एक तरल पदार्थ छोड़ते हैं जिसके कारण पत्तियों पर काले रंग के फंगस यानि फफूंद लग जातें हैं और पौधों में सही से प्रकाश नहीं मिलता हैं जिसके कारन पौधा अपने लिए भोजन नहीं बना पता है जिससे उपज और गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता हैं।

फूलगोभी में माहू कीट से नियंत्रण : सबसे पहले गोभी की फसल में पीले रंग के 12 से 15 स्टिकी ट्रैप प्रति एकड़ की दर से लगाएं इसके बाद 1 लीटर पानी में 2 से 5 मिली नीम तेल मिला कर खेतों में छिड़काव करें।  अगर फसल में ज्यादा माहू दिखाई देते हैं तो इसके लिए ( Dehaat Contropest) 12 से 15 ग्राम प्रति एकड़ इमिडाक्लोप्रिड 70% WG कीटनाशक का छिड़काव करें।

  • डायमंड बैक मोथ कीट : यह कीट गोभी की फसल में ज्यादातर देखा गया है इस कीट के लक्षण की बात करें तो यह पौधों में पत्तों के नीचे अंडे देता है। हरे रंग की सुंडी पत्तों पर अटैक करती है और पत्तों को खा लेती है जिससे पौधों की पत्तियों में छेद हो जातें हैं। अगर इस कीट को समय से नहीं रोका गया तो इसके कारण गोभी के किसानों को लगभग 75 से 90 प्रतिशत तक नुकसान पहुँचाता है।

फूलगोभी में डायमंड बैक मोथ कीट से नियंत्रण : इस कीट से गोभी की फसल को बचाने के लिए इसका संक्रमण दिखने पर खेत में 12 से 15 पीले स्टिकी ट्रैप (चिपचिपा प्रपंच) प्रति एकड़ की दर से लगाएं। अगर इसका प्रकोप ज्यादा समझ आने लगे तो इसमें ( Dehaat Illigo) ईमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी दवा को 100 मिली एक एकड़ के हिसाब से छिड़काव करने से नियंत्रण मिलता हैं। अगर इनका संक्रमण इस दवा से नियंत्रित न हो तो फिर इसमें क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी  दवा का छिड़काव 60 मिली प्रति एकड़ के हिसाब से करें।

  • तम्बाकू इल्ली कीट : तम्बाकू इल्ली सबसे पहले झुण्ड में आकर पत्तागोभी के पत्तों को खाती हैं। उसके बाद यह धीरे-धीरे पुरे खेत में नुकसान करती हैं। गोभी की फसल में यह पौधे को खाती है इसके बाद उसमें अपना मल करती है जिससे फूल बर्बाद हो जाता हैं।

तम्बाकू इल्ली कीट से नियंत्रण : पत्तागोभी की फसल में तम्बाकू इल्ली के नए पतंगों को नियंत्रित करने के लिए 8-10 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ की दर लगाएं इससे काफी हद तक नियंत्रण कर सकते हैं इसके बाद भी अगर इनका संक्रमण दिखता है तो उसके लिए ( Dehaat Illigo) ईमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी दवा का छिड़काव 100 मिली प्रति एकड़ की दर से के हिसाब से छिड़काव करे। और ज्यादा संक्रमण दिखने पर 60 मिली क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी दवा का छिड़काव प्रति एकड़ की दर से करें।

पत्तागोभी की फसल में कीटों से नियंत्रण के लिए जैविक उपाय :

  • जैव कीटनाशक पौधों, जानवरों या सूक्ष्मजीवों से प्राप्त प्राकृतिक पदार्थ होते हैं जो कई बार कीटों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। बैसिलस थुरिंजिएन्सिस (बीटी) गोभी में इल्ली (कैटरपिलर) को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए जानें वाला जैव कीटनाशक है। इससे एक विष निकलता है जो कैटरपिलर के लिए हानिकारक होता है पर इसका मनुष्यों और जानवरों पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है।
  • कीटों को नियंत्रित करने के लिए गोभी के खेत में लेडीबग्स, लेसविंग्स और परजीवी ततैया जैसे प्राकृतिक दुश्मन छोड़े जा सकते हैं। ये कीड़े एफिड्स और कैटरपिलर जैसे कीटों पर फ़ीड करते हैं और उनकी आबादी को कम करने में मदद करते हैं।
  • गोभी की फसल में कीटों को नियंत्रित करने के लिए फसल चक्रण एक प्रभावी तरीका है। इसमें अलग-अलग मौसमों में एक ही खेत में अलग-अलग फसलें लगाना शामिल है। यह कीटों के जीवन चक्र को तोड़ने में मदद करता है और उनकी आबादी को कम करता है।
  • ट्रैप फसलें ऐसे पौधे हैं जो कीटों के लिए आकर्षक होते हैं और उन्हें मुख्य फसल से दूर करने के लिए लगाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, एक जाल फसल के रूप में सरसों रोपण गोभी एफिड्स को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
  • फेरोमोन ट्रैप ऐसे जाल हैं जो नर कीड़ों को आकर्षित करने और फंसाने के लिए सिंथेटिक फेरोमोन का उपयोग करते हैं। यह गोभी के पतंगों जैसे कीटों की आबादी को कम करने में मदद करता है।

क्या आप भी पत्तागोभी की फसल में कीटों से परेशान हैं? अपना जवाब एवं अनुभव हमें कमेंट करके बताएं। इसी तरह की अन्य रोचक एवं महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए 'किसान डॉक्टर' चैनल को अभी फॉलो करें। और अगर पोस्ट पसंद आयी तो इसे लाइक करके अपने किसान दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | Frequently Asked Question (FAQs)

Q: पत्तागोभी कब लगाई जाती है?

A: अगर आप पत्तागोभी की खेती करना चाहते हैं तो जुलाई-अगस्त और सितंबर-अक्टूबर के महीनें में इसकी खेती की जाती है और जुलाई से अगस्त का समय अगेती फूल गोभी लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

Q: पत्तागोभी की पौध कितने दिन में तैयार होती है?

A: पत्तागोभी की फसल 40-45 दिन में तैयार हो जाती है।

Q: पत्तागोभी में कौन सा रोग होता है?

A: पत्तागोभी की फसल में रोग मौसम और किस्मों के अनुसार लगते हैं जैसे- अगर अगेती गोभी की फसल लगाई है तो उसमें अल्टरनेरिया पत्ती ध्ब्बा और काला सड़न रोग ज्यादातर लगता है। इसके अलावा अगर मध्य-अगेती और मध्य-पछेती समूह की किस्म लगाई है तो उसमें मृदुल आसिता और काला सड़न रोग मुख्य रूप से लगता है। मध्य समूह की पत्तागोभी में मृदुल आसिता रोग की समस्या ज्यादा होती है।

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