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8 June
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गोभी: कीट, लक्षण, बचाव एवं उपचार | Cauliflower: Pests, Symptoms, Prevention and Treatment

फूल गोभी एवं पत्ता गोभी की खेती समान्तयः ठंड के मौसम में की जाती है। लेकिन पॉलीहाउस में इसकी खेती लगभग सभी मौसम में सफलतापूर्वक की जा रही है। गोभी वर्गीय फसलों में कई तरह के कीटों का प्रकोप होता है। जिनमें डायमंड बैक मोथ (हीरक पृष्ठ कीट/पतंगा), तंबाकू सुंडी, गोभी का तेला कीट, पत्ती एवं फल छेदक इल्ली, गोभी तितली, कैबेज मैगट कीट, आदि प्रमुख हैं। फसल को इन कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए इनसे होने वाले नुकसान और नियंत्रण की जानकारी होना आवश्यक है।

गोभी की फसल में लगने वाले कुछ प्रमुख कीट एवं नियंत्रण के तरीके | Major Pests in Cauliflower Crop and Their Control Methods

डायमंड बैक मोथ (हीरक पृष्ठ कीट/पतंगा) से होने वाले नुकसान:

यह गोभी वर्गीय सब्जी का मुख्य कीट है। इस कीट की सुंडी पत्तियों में छेद करके पत्ती खाता है, पत्तियों में केवल नसें जैसे दिखने लगती है एवं पत्ती को हिलाने पर छोटे-छोटे हरे-स्लेटी रंग के सुंडी कीट दिखने को मिलते हैं। ये कीट फलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे किसान को काफी नुकसान होता है।

डायमंड बैक मोथ पर नियंत्रण के तरीके:

  • प्रति एकड़ खेत में 4-6 फेरोमॉन ट्रैप का प्रयोग करें।
  • प्रति एकड़ खेत में 50 मिलीलीटर ब्रोफ्लानिलाइड 20% एससी (पीआई- ब्रोफ्रेया) को 150-200 लीटर पानी में मिला कर छिड़काव करें।
  • 300 मिलीलीटर नोवलूरॉन 5.25% + इंडोक्साकार्ब 4.5% w/w एस सी (अडामा प्लेथोरा) को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • क्लोरफेनेपायर 10% एससी (बीएएसएफ इंटरेपिड) की 300 मिलीलीटर मात्रा 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • लूफेनुरॉन 5.4% ईसी (क्रिस्टल लूनॉक्स) की 200-220 मिलीलीटर मात्रा 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • नोवलुरोन 5.25% + इमामेक्टिन बेंजोएट 0.9% एससी (यूपीएल गुंथर) की 300 मिलीलीटर मात्रा 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

तंबाकू सुंडी से होने वाले नुकसान: इस कीट की सुंडी झुंड में हमला करती हैं एवं कोमल पत्ती को खाती हैं पौधों में फल आने पर ये गोभी के फलों को भी खा कर नुकसान पहुंचाते हैं, जो पैदावार में कमी का एक बड़ा कारण बनते हैं।

तंबाकू सुंडी पर नियंत्रण के तरीके:

  • प्रति एकड़ खेत में 4-6 फेरोमॉन ट्रैप का प्रयोग करें।
  • नोवेल्यूरॉन 10% ईसी (यूपीएल यूनिरॉन) की 300 मिलीलीटर मात्रा 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • क्लोरोपाइरीफॉस 20% ईसी (टाटा तफ़ाबन) की 500 मिलीलीटर मात्रा 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • ब्रोफ्लानिलाइड 300जी/एल एससी (बीएएसएफ एक्सपोनस) की 25-34 मिलीलीटर मात्रा 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

गोभी तितली से होने वाले नुकसान: इस कीट की रोमिल इल्लियां झुंड में पौधों के पत्तों को खाती हैं। इल्लियां फूलों में घुसकर इन्हें भी बरबाद कर देती हैं।

गोभी तितली पर नियंत्रण के तरीके:

  • इमिडाक्लोप्रिड 70% डब्ल्यू जी (देहात कॉन्ट्रोपेस्ट) की 50-70 ग्राम मात्रा 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • थियामेथोक्सम 12.6% + लैम्बडासाइहलोथ्रिन 9.5% जेड सी (देहात इंटोकिल) की 80-100 मिलीलीटर मात्रा 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

गोभी का तेला कीट से होने वाले नुकसान: इसके शिशु और वयस्क कीट पत्तों और फूलों की कोशिकाओं से रस चूसते हैं। ये ज्यादातर पौधे की पत्तियों और अग्रिम भागों पर देखे जाते हैं। इस कीट के प्रकोप से पौधे अस्वस्थ लगते हैं और पत्ते मुड़ जाते हैं। प्रभावित हिस्से विकृत हो जाते हैं। कीट से निकले मीठे चिपचिपे पदार्थ (मधुरस) से पत्तों पर काली फफूंद लग जाती है।

गोभी का तेला कीट पर नियंत्रण के तरीके:

  • इमिडाक्लोप्रिड 70% डब्ल्यू जी (देहात कॉन्ट्रोपेस्ट) की 50-70 ग्राम मात्रा 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • थियामेथोक्सम 12.6% + लैम्बडासाइहलोथ्रिन 9.5% जेड सी (देहात एंटोकिल) की 80-100 मिलीलीटर मात्रा 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

कैबेज मैगेट से होने वाले नुकसान: इस कीट का लार्वा पौधों की छोटी जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह कीट पौधों की पत्तियों को भी क्षतिग्रस्त कर देते हैं।

कैबेज मैगेट पर नियंत्रण के तरीके:

  • क्लोरोपाइरीफॉस 20% ईसी (टाटा तफ़ाबन) की 500 मिलीलीटर मात्रा 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

कीटनाशकों के छिड़काव के समय रखें इन बातों का ध्यान

  • कीटनाशक का घोल तैयार करने के लिए साफ पानी का प्रयोग करें।
  • कीटनाशक के साथ 50-60 मिलीलीटर सिलिका आधारित स्टिकर (गोंद) प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।
  • कीटनाशक के छिड़काव के समय पूरे कपड़े पहनें। जिससे दवा आपके शरीर पर न लगे।
  • हाथ में दस्ताने का प्रयोग करें।
  • नाक, मुंह एवं पूरा चेहरा को बढ़िया तरीके से ढ़क लें।
  • जब तेज हवा चल रही हो, तो उस समय दवा का प्रयोग नहीं करें।
  • कीटनाशक का छिड़काव शाम के समय करें।
  • अगर कीटनाशक के छिड़काव के बाद आंखों में जलन, सांस लेने में कठिनाई, खुजली, जैसी समस्या आने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
  • छोटे बच्चे को कीटनाशकों से दूर रखें।

गोभी वर्गीय फसलों में किस कीट का प्रकोप अधिक होता है और इन पर नियंत्रण के लिए आप किन दवाओं का प्रयोग करते हैं? अपने जवाब हमें कमेंट के द्वारा बताएं। फसलों को विभिन्न रोगों एवं कीटों से बचाने की अधिक जानकारी के लिए 'किसान डॉक्टर' चैनल को अभी फॉलो करें। इसके साथ ही इस पोस्ट को लाइक एवं शेयर करके आप इस जानकारी को अन्य किसानों तक पहुंचा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | Frequently Asked Question (FAQs)

Q: गोभी की फसल को कीट से कैसे बचाव करें?

A: बीज एवं मिट्टी को कीटनाशक दवा से उपचार करें एवं कीट के प्रति सहनशील/कीट रोधी किस्म का चयन करें। एक ही खेत में गोभी को ना लगाएं और फसल चक्र अपनाएं।

Q: गोभी में कौन सा कीट पाया जाता है?

A: गोभी वर्गीय फसल (फूल गोभी, पत्ता गोभी, ब्रॉकोली) में कई तरह के कीटों का प्रकोप होता है। जिनमें हीरक कीट, टेपवर्म, कैबेज बटरफ्लाई, जैसे कई तरह के कीटों का प्रकोप होता है। इनमें से कुछ कीट पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा कर तो वहीं कुछ कीट पत्तियों को खा कर फसल की उपज में कमी का कारण बनते हैं।

Q: बेहतर पैदावार के लिए क्या करें?

A: गोभी वर्गीय सब्जी की अधिक पैदावार के लिए समय-समय पर खाद, सिचाई एवं पोषक तत्व का प्रबंधन करें। फसल की अगेती बुवाई करें।

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