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14 June
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मक्का में उर्वरक प्रबंधन (Fertilizer Management in Maize)


मक्का में कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि मक्का को यह पोषण कहाँ से मिलता है? मक्के की फसल पोषक तत्व मिट्टी से प्राप्त करती है। मक्के की खेती के लिए हमेशा उच्च गुणवत्ता वाली मिट्टी का चुनाव करना जिसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में उपलब्ध हों। जैसे : नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम और जैविक उर्वरक जैसे पोषक तत्व मिट्टी की उर्वरता और पोषण को पुनर्जीवित करते हैं।

कैसे करें उर्वरक प्रबंधन मक्के में? (How to Manage Fertilizer in Maize?)

मक्का में फसल की अवस्थाओं के अनुसार उर्वरक एवं पोषक तत्व प्रबंधन

मक्का की फसल में अच्छी वृद्धि-विकास के लिए पौधे की हर अवस्था पर विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। सही समय पर उचित पोषक तत्वों का प्रबंधन करने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में वृद्धि होती है।

बुवाई के पहले खाद प्रबंधन:

  • मक्का की फसल की उत्पादकता बढ़ाने के लिए बुवाई से लगभग 10 से 15 दिन पहले खेत की तैयारी के समय 50 क्विंटल अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद या सड़ी हुई कम्पोस्ट खाद प्रति एकड़ खेत में मिलाएं। इससे मिट्टी की उर्वरता, फसल वृद्धि और फसल की पैदावार अच्छी होती है।
  • अगर सिंचित क्षेत्रों में मक्के की खेती कर रहे हैं तो मिट्टी की तैयारी के समय बुवाई से पहले 4-5 टन प्रति एकड़ एफवाईएम या कम्पोस्ट को खेत में मिलाएं। 1-2 किलो एजोस्पिरिलम (Azospirillum) का उपयोग करें।
  • वर्षा आधारित क्षेत्रों में मक्के की खेती करने के लिए, समान मात्रा में एफवाईएम या कम्पोस्ट या नारियल के पत्ते का उपयोग करें और इसे फैलाएं। वर्षा आधारित मक्का की फसल को सिंचित मक्का की तुलना में अधिक उर्वरक की आवश्यकता होती है। देहात ओजियर (DeHaat Oozier) दवा जो एक जैविक मृदा मॉइस्चराइज़र है जिसमें कार्बनिक पदार्थ, Ca, Mg, N, P और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व शामिल हैं। इसका उपयोग मिटटी की तैयारी के समय 5 (पाँच) किलो प्रति एकड़ की दर से करें।
  • मक्के में अधिक उत्पादन के लिए जिंक सल्फेट पोषक तत्व काफी महत्वपूर्ण है जिसकी पूर्ति के लिए प्रति एकड़ 3 से 4 किलोग्राम देहात बायो जिंक का उपयोग करना चाहिए। जिंक का प्रयोग किसी भी प्रकार के फास्फोरस युक्त उर्वरक के साथ न करें। यह फसल में जिंक की उपलब्धता को कम करता है।
  • मिट्टी जांच में अगर सल्फर की कमी होती है तो उसकी पूर्ति के लिए 4 किलोग्राम बेंटोनाइट सल्फर (Bentonite Sulphur) प्रति एकड़ की दर से खेत में बुवाई के समय देना चाहिए।
  • मिट्टी में अगर बोरॉन की कमी होती है तो DTB (Disodium Tetraborate Pentahydrate)-B 14.5% बोरॉन 1 किलोग्राम प्रति एकड़ खेत के लिए काफी होता है। खेत में बोरॉन की पूर्ति बुवाई के समय की जानी चाहिए।

बुवाई के समय पोषक तत्व प्रबंधन:

  • खेत की तैयारी के समय 50 किलोग्राम डीएपी और 50 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश  + stigmo MR 10 किलोग्राम और Dehaat Starter (देहात स्टार्टर) 4 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से खेत में डालें।

बुवाई के बाद प्रारंभिक अवस्था (20-25 दिन बाद):

  • नाइट्रोजन की कमी से पत्तियां कम हरी हो जाती हैं और निचली पत्तियां झड़ने लगती हैं। इसके लिए 30 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ की दर से उपयोग करें।
  • बोरॉन की कमी से डंठल पर दरारें बनने लगती है और नई कलियां सूखने लगती हैं। इसके लिए देहात कैल्शियम बोरेट (Calcium borate) 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

मध्यावधि अवस्था (40-50 दिन बाद):

  • बची हुई आधी नाइट्रोजन की मात्रा का छिड़काव करें। इससे फसल की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है।
  • सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, और जिंक का छिड़काव फसल की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक होता है। इसके लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों के मिश्रण मल्टीप्लेक्स कंपनी का प्रोकिसान दवा का इस्तेमाल 200 ग्राम प्रति एकड़ की दर से करें।

फूल और दाना बनने की अवस्था:

  • पोटेशियम फसल के इस चरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह फसल में पानी और शर्करा के विनियमन में सहायता करता है। फॉस्फोरस जड़ों की वृद्धि में मदद करता है और सल्फर प्रोटीन संश्लेषण में सहायक होता है। इसकी पूर्ति के लिए 5 किलोग्राम एस.ओ.पी (पोटेशियम सल्फेट) 00:00:50+17.5% एस और बोरॉन डीओटी (डिसोडियम ऑक्टाबोरेट टेट्राहाइड्रेट) बी-20% को 500 ग्राम ले कर इसे सिंचाई के माध्यम से प्रति एकड़ खेत में देना चाहिए।

फसल कटाई के समय:

  • खेत में फसल अवशेष जैसे भूसे का पुनः उपयोग करें, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होते हैं।
  • फसल कटाई के बाद हरी खाद का प्रयोग करें, जो अगली फसल के लिए मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करता है।

उपरोक्त पोषक तत्व प्रबंधन से मक्का की फसल को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे उसकी पैदावार और गुणवत्ता में वृद्धि होती है। नियमित मिट्टी परीक्षण और अनुशंसित उर्वरकों का सही समय पर उपयोग करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

क्या आप मक्का में बेहतरीन उपज पाना चाहते हैं? अपना जवाब एवं अनुभव हमें कमेंट करके बताएं। इसी तरह की अन्य रोचक एवं महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए 'कृषि ज्ञान ' चैनल को अभी फॉलो करें। और अगर पोस्ट पसंद आयी तो इसे लाइक करके अपने किसान दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | Frequently Asked Questions (FAQs)

Q: मक्का बोने का सही समय क्या है?

A: खरीफ मौसम में मक्का बोने का आदर्श समय जून के पहले सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह के बीच होता है, जो क्षेत्र और मौजूदा मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है। मक्का एक गर्म मौसम की फसल है और अंकुरण और विकास के लिए गर्म मिट्टी के तापमान की आवश्यकता होती है।

Q: 1 एकड़ में कितना मक्का बीज लगता है?

A: भारत में एक एकड़ भूमि के लिए आवश्यक मक्का के बीज की मात्रा विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है जैसे कि मक्का की किस्म, पौधों के बीच की दूरी और बुवाई की विधि। औसत, 60 सेमी x 20 सेमी की दूरी के लिए, एक एकड़ भूमि के लिए लगभग 20-25 किलोग्राम मक्का के बीज की आवश्यकता होती है।

Q: मक्के की उन्नत किस्म कौन सी है ?

A: भारत में, मक्का की कई उन्नत किस्में हैं जिन्हें विभिन्न कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित किया गया है। इनमें से कुछ किस्में है - एचएम-4, गंगा -5, जंबो 55 - 9181, अफ़्रीकन जायंट, सरदार 918, डीएचएम - 7150, मास्टर 2244, रोबस्ट, मास्टर 1323, करण 333, शक्तिमान -1, किसान, एन के 7720 (सिंजेंटा), कॉर्नेटो 7332, विजय (सिगनेट 22), प्रो 311 इत्यादि।

Q: मक्के की खेती कितने दिन में होती है?

A: मक्के की फसल की अवधि किस्म और उस स्थान पर निर्भर करती है। आम तौर पर, मक्के की बुवाई से परिपक्व होने में मध्यम अवधि वाली किस्मों को लगभग 90 से 120 दिन, मक्के की जल्दी पकने वाली किस्में 70 से 80 दिन और देर से पकने वाली किस्मों को 150 दिन लगते हैं परिपक्व होने में।

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