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किसान डॉक्टर
13 Jan
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गेहूं में रतुआ रोग का प्रबंधन

गेहूं में रतुआ रोग का प्रबंधन

रतुआ रोग कई तरह के होते हैं। गेहूं की फसल को इस रोग के कारण सर्वाधिक नुकसान होता है। यह रोग भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में पाया जाता है। यह एक कवक जनित रोग है। इस पोस्ट में बताई गई दवाओं का प्रयोग कर के आप गेहूं की फसल में रतुआ रोग पर आसानी से निजात पा सकते हैं।

रतुआ रोग के प्रकार

  • पीला रतुआ रोग: पीला रतुआ रोग को कई क्षेत्रों में येलो रस्ट या धारीदार रतुआ रोग के नाम से भी जाना जाता है। इस रोग से प्रभावित पौधों की पत्तियों पर पीले रंग की धारियां उभरने लगती हैं। कुछ समय बाद पूरी पत्तियां पीले रंग की हो जाती हैं। मिट्टी में भी पीले रंग के पाउडर के समान तत्व गिरने लगते हैं। कल्ले निकलने के समय पीला रतुआ रोग होने पर पौधों में बालियां नहीं बनती हैं।
  • भूरा रतुआ रोग: भूरा रतुआ रोग को ब्राउन रस्ट या पत्ती का रतुआ रोग भी भी कहा जाता है। यह रोग देश के लगभग सभी क्षेत्रों में पाया जाता है। इस रोग से प्रभावित पौधों में शुरुआत में पत्तियों की ऊपरी सतह पर नारंगी रंग के धब्बे उभरने लगते हैं। कुछ समय बाद यह धब्बे गहरे भूरे रंग में परिवर्तित हो जाते हैं। इस रोग के कारण गेहूं की पैदावार में 30 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
  • काला रतुआ रोग: काला रतुआ रोग को ब्लैक रस्ट या तने का रतुआ रोग भी कहते हैं। शुरुआत में इस रोग के होने पर पौधों के तने एवं पत्तियों पर गहरे भूरे रंग के धब्बे उभरने लगते हैं। रोग बढ़ने के साथ धब्बों का रंग काला होने लगता है। 20 डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक तापमान होने पर यह रोग तेजी से फैलता है।

कैसे करें नियंत्रण?

  • पीला रतुआ रोग पर नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ खेत में 300 मिलीलीटर एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 11% + टेबुकोनाज़ोल 18.3% एस.सी. (देहात- एजीटॉप) का प्रयोग करें।
  • भूरा एवं काला रतुआ रोग पर नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ खेत में 600-800 ग्राम मैंकोजेब 75% डब्ल्यू.पी. (देहात DeM-45, धानुका एम-45, इंडोफिल एम- 45) का प्रयोग करें।
  • प्रति एकड़ खेत में 300 मिलीलीटर टेबुकोनाज़ोल 250 ईसी (बायर- फोलिकुर) का प्रयोग काला रतुआ रोग पर नियंत्रण के लिए कारगर है।
  • प्रति एकड़ खेत में 200 मिलीलीटर एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 18.2% +डिफेनोकोनाजोल 11.4% एस.सी (देहात- सीनपैक्ट, बीएसीएफ-एड्रोन, गोदरेज- बिलियर्ड्स) के प्रयोग से भी गेहूं की फसल में रतुआ रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है।
  • 200 मिलीलीटर प्रोपिकोनाजोल 25 ई.सी (अदामा- बम्पर) को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

क्या आपकी गेहूं की फसल में कभी रतुआ रोग का प्रकोप हुआ है? इस पर नियंत्रण के लिए आपने किन दवाओं का प्रयोग किया? अपने जवाब हमें कमेंट के द्वारा लिख कर भेजें। फसलों को विभिन्न रोगों एवं कीटों से बचाने की अधिक जानकारी के लिए 'किसान डॉक्टर' को फॉलो करना न भूलें। इसके साथ ही इस पोस्ट को अन्य किसानों के साथ लाइक और शेयर भी करें।

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