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16 Apr
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मूँगफली की खेती: खरपतवारों पर नियंत्रण के कारगर तरीके (Groundnut cultivation: effective ways to control weeds)


मूंगफली भारत की मुखय महत्त्वपूर्ण तिलहनी फसल है। यह गुजरात, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडू तथा कर्नाटक राज्यों में सबसे अधिक उगाई जाती है। अन्य राज्य जैसे मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान तथा पंजाब में भी यह काफी महत्त्वपूर्ण फसल मानी जाने लगी है। राजस्थान में इसकी खेती लगभग 3.47 लाख हैक्टर क्षेत्र में की जाती है जिससे लगभग 6.81 लाख टन उत्पादन होता है। इसकी औसत उपज 1963 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर (2010-11) है । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्‌ के अधीनस्थ अनुसंधानों संस्थानों, एवं कृषि विश्वविद्यालयों ने मूंगफली की उन्नत तकनीकियाँ जैसे उन्नत किस्में, रोग नियंत्रण, निराई-गुड़ाई एवं खरपतवार नियंत्रण आदि विकसित की हैं जिनका विवरण नीचे दिया गया हैं।

कैसे करते हैं खरपतवार मूँगफली की फसल में नुकसान (How do weeds damage the groundnut crop)

  • पोषण की कमी (Nutrient Deficiency): खरपतवार मिट्टी से पानी, नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्वों को ग्रहण करते हैं, जिसके कारण मूँगफली के पौधों को इनकी कमी हो जाती है।
  • पानी की कमी (insufficiency of water): खरपतवार मूँगफली की फसल के लिए पानी की स्तर को कम कर सकते हैं, जिससे फसल की वृद्धि और उत्पादकता प्रभावित होती है।
  • प्रकाश की कमी (Lack of Sunlight): खरपतवार मूँगफली के पौधों को ढककर उन्हें सूर्य की रोशनी से वंचित करते हैं, जिससे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रभावित होती है और पौधों की वृद्धि और विकास धीमा हो जाता है।
  • रोग और कीट (Diseases and pests): खरपतवार रोगों और कीटों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं, जिससे मूँगफली की फसल में रोगों और कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है।
  • उपज में कमी (Yield Reduction): खरपतवारों के कारण मूँगफली की फसल की उपज में कमी हो सकती है।
  • फलों की गुणवत्ता में कमी (Decrease in fruit quality): खरपतवारों के कारण मूँगफली के फलों का आकार छोटा हो सकता है और उनकी गुणवत्ता भी कम हो सकती है।
  • लागत में वृद्धि (Cost Increase) : खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए किसानों को विभिन्न तरीकों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है।

👉खरपतवार नियंत्रण के आसान तरीके | Easy methods of weed control

  • खरपतवार नियंत्रण की सबसे सरल विधि निराई-गुड़ाई है, समय पर निराई-गुड़ाई न होने पर भी उत्पादन कम हो सकता है। इस लिए खेत में कम से कम 2 से 3 बार निराई-गुड़ाई करनी चाहिए।
  • निंदाई – गुड़ाई से भूमि पोली बनी रहती है जिससे वायु के अच्छे संचार से जड़ों को पोषक तत्व और जल सही मात्रा में मिलता है।
  • 4-5 सेंटीमीटर से अधिक गहराई में निराई-गुड़ाई न करें इससे फसल की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
  • अंतर-फसल लगाएं
  • खेत में खरपतवार के नियंत्रण के लिए मल्चिंग अथवा 'पलवार' एक उन्नत विधि है।
  • खेत में लगे पौधों की जमीन को चारों तरफ से प्लास्टिक कवर, पुआल या पत्तों आदि के द्वारा सही तरीके से ढकने को मल्चिंग कहते हैं।
  • इससे खरपतवार का अंकुरण या विकास नहीं हो पाता है। इस तकनीक से फसल को लंबे समय तक खरपतवारों से सुरक्षित रखा जा सकता है।
  • जब खरपतवार 2-3 पत्ती की अवस्था में होते हैं तब ऑक्सीफ्लोरफेन 23.5% EC@185-340 मि.ली./एकड़ या प्रोपाक्विजाफॉप 10% EC@200 मि.ली./एकड़ या क्विज़ालोफॉप-एथिल 5% EC@300-400 मि.ली./एकड़ की दर से छिड़काव करें।

⚠️ खरपतवारनाशक का उपयोग करते समय ध्यान रखने योग्य बाते:-

  • सही मात्रा: सही मात्रा में खरपतवार नाशक का उपयोग करना बहुत ही महत्वपूर्ण है, इससे फसल को हानि नहीं पहुचती है और खरपतवारों  का पूर्ण रूप से नियंत्रण हो सकता है।
  • सही समय उपयोग: खरपतवार नाशक का सही समय पर उपयोग करना आवश्यक है, इससे उसकी प्रभावशीलता बढ़ती है। और शाम के वाट दवा का छिड़काव ज्यादा प्रभावी माना गया है।
  • समय सीमा: एक्सपायरी हुई खरपतवार नाशी का उपयोग न करें, खरीदते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
  • नॉपसैक पंप का उपयोग: खरपतवारनाशक को छिड़काव करते समय फ्लैट फेन नोजल या अच्छे छिड़काव वाले पंप से ही खरपतवारनाशी का छिड़काव करें ताकि दवा आसानी से पूरे पौधे तक पहुचें। जिससे उसका प्रभाव पूरी तरह से फसल पर होता है।
  • नमी का ध्यान: खरपतवारनाशक को छिड़काव करने से पहले, या अगर छिड़काव के बाद बारिश होती है, तो ध्यान दें कि जमीन में पर्याप्त नमी होनी चाहिए।
  • अनुपातिक शर्तें: खरपतवारनाशक को छिड़काव करने के लिए अनुपातिक शर्तें की जांच करें, जैसे कि तेज हवा या बारिश की संभावना।
  • छिड़काव का ध्यान: छिड़काव करते समय, पीछे पीछे जाना चाहिए ताकि किसी भी भूमिगत फसल को नुकसान न हो।
  • फसल के आसपास का ध्यान: खरपतवारनाशक को छिड़काव करते समय, ध्यान रखें कि फसल के आसपास कोई और फसल न हो, ताकि उस फसल को हानि न पहुचे।
  • हुड का इस्तेमाल: हुड का इस्तेमाल करना फसल को खतरे से बचाने में मदद कर सकता है, खासकर जब छिड़काव किसी अन्य फसल के आसपास किया जा रहा हो।
  • समय-समय पर उपयोग करें: खरपतवार नियंत्रण के लिए परिस्थिती के अनुसार, सिफारिश के अनुसार, खरपतवारनाशक का उपयोग करें, और बार-बार उपयोग से बचें।
  • खरपतवार नाशक का छिड़काव की जाने वाली जमीन में वर्मीकंपोस्ट, गोबरखाद का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • इसके अतिरिक्त दवा के साथ चिपको का उपयोग करें जिससे दवा आसानी से पुरे पौधे तक पहुचे और जल्दी असर दिखाए।
  • ये सभी बातें खरपतवारनाशक के सही उपयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए किसान अपनी फसल को खरपतवारों से बचा सकता है।

आप खरपतवारों को खेतों से भगानें के लिए क्या जुगाड़ करते हैं? अपना जवाब एवं अनुभव हमें कमेंट करके बताएं। इसी तरह की अन्य रोचक एवं महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए 'खरपतवार जुगाड़' चैनल को अभी फॉलो करें। और अगर पोस्ट पसंद आयी तो इसे लाइक करके अपने किसान दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | Frequently Asked Question (FAQs )

Q: खरपतवार जैव नियंत्रण क्या है?

A: खरपतवारों को बायोएजेंट जैसे कीड़े, रोगज़नक़ आदि और अन्य जानवरों का उपयोग खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। कीट और रोगजनक खरपतवारों पर आक्रमण करते हैं और वे या तो खरपतवारों की वृद्धि कम कर देते हैं या उन्हें नष्ट कर देते हैं।

Q: निराई कैसे की जाती है?

A: खेत में पनपने वाले खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए निराई की जाती है। निराई के लिए खुरपी, कुदाल या हैरो का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया में खरपतवारों को जड़ से उखाड़ कर या भूमि की ऊपरी सतह के पास से काट कर निकाला जाता है। इस प्रक्रिया में समय एवं श्रम की आवश्यकता अधिक होती है। इसलिए बड़े खेतों की तुलना में छोटे खेतों में इस विधि का प्रयोग अधिक किया जाता है।

Q: खरपतवार नियंत्रण की कितनी विधियां हैं?

A: खरपतवार नियंत्रण के कई तरीके हैं जिनका उपयोग कृषि में किया जा सकता है। सबसे आम तरीकों में सांस्कृतिक, यांत्रिक, रासायनिक और जैविक नियंत्रण शामिल हैं। सांस्कृतिक नियंत्रण में खरपतवार की वृद्धि को रोकने के लिए फसल चक्र अपनाया जाता है, इंटरक्रॉपिंग और मल्चिंग जैसी प्रक्रियाएं भी की जाती हैं। यांत्रिक नियंत्रण में हाथ से निराई-गुड़ाई और घास की कटाई के द्वारा खरपतवारों को हटाया जाता है। रासायनिक नियंत्रण में खरपतवारों को मारने के लिए शाकनाशी का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा जैविक उत्पादों का प्रयोग करके भी खरपतवारों से छुटकारा मिल सकता है।

Q: खरपतवार को कैसे रोके?

A: खेत में खरपतवारों को पनपने से रोकने के लिए फसल को लगाने से पहले गहरी जुताई करें। इससे खेत में पहले से मौजूद खरपतवार नष्ट हो जाएंगे। बुवाई के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज का चयन करें। बुवाई से पहले बीज को अच्छे से साफ करें। इस बात को सुनिश्चित करें की फसलों के बीज के साथ खरपतवारों के बीज न हों। खेत में मल्चिंग करना भी इस समस्या से निजात दिलाता है। इसके साथ ही बुवाई के बाद 2 दिनों के अंदर रासायनिक खरपतवार नाशक का प्रयोग कर के भी हम इस समस्या से बच सकते हैं।

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