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26 May
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ग्वार: प्रमुख कीट, लक्षण, बचाव एवं नियंत्रण (Guar: Major pests, symptoms, prevention and control)


ग्वार भारत के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाने वाली फसल है, इसकी खेती मुख्य रूप से राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और पंजाब में उगाई जाती है। ग्वार सूखा, कम वर्षा वाली परिस्थितियों और खराब मिट्टी में भी अच्छी तरह से उगाई जा सकती है। ग्वार मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए लगाया जाता है, जिससे ग्वार गम का उत्पादन किया जाता है, जो खाद्य, दवा और औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग होता है। ग्वार की फसल जून-जुलाई में बोई जाती है और अक्टूबर-नवंबर में काटी जाती है। इसके अलावा, यह फसल पशुओं के चारे के रूप में भी उपयोगी है। ग्वार की फसल में कई प्रकार के कीटों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती है।

कैसे करें ग्वार की फसल में कीट नियंत्रण? (How to control pests in guar crop?)

ग्वार की फसल में कई प्रमुख कीटों का प्रकोप होता है। इन कीटों के लक्षण, बचाव एवं नियंत्रण के उपाय निम्नलिखित हैं:

  • एफिड (चेपा या माहू)
      1. लक्षण: ये कीट पौधे की जड़ों को छोड़कर बाकी सभी हिस्सों का रस चूसते हैं। इससे पत्तियां मुड़ जाती हैं, पौधे कमजोर और रोगी दिखाई देते हैं। ग्रसित फलियों में कमजोर और सिकुड़े हुए बीज बनते हैं।
      2. नियंत्रण: ग्वार की शीघ्र पकने वाली तथा एफिड रोधी किस्मों का चयन करें। इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 5 मिली/15 लीटर या डायमेथ 30 ईसी 1.0 मिली प्रति लीटर में घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • लीफ हॉपर (जैसिड)
      1. लक्षण: पत्तियां किनारों से पीली पड़ना शुरू होती हैं और बाद में पूरी पत्ती पीली होकर सूख जाती है। अधिक प्रकोप से पौधों की बढ़वार रुक जाती है।
      2. नियंत्रण: इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 5 मिली/ 15 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
  • सफेद मक्खी
      1. लक्षण: यह कीट पौधे का रस चूसता है और मधु उत्सर्जित करता है जिस पर काली फफूंद विकसित हो जाती है। इससे पत्तियां कमजोर और पीली पड़ जाती हैं।
      2. नियंत्रण: ट्राइजोफॉस 40 ईसी 2.0 मिली/लीटर या डायमेथ 30 ईसी 1.0 मिली/लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • फली छेदक
      1. लक्षण: ये कीट फलियों के दानों को खराब कर देते हैं, जिससे फलियों को अधिक नुकसान होता है।
      2. नियंत्रण: क्विनालफॉस 25 ईसी 1.5 मिली प्रति लीटर या प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 1.5 मिली प्रति लीटर या इंडोक्साकार्ब 1 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर पौधों पर छिड़काव करें।
  • पत्ती छेदक
      1. लक्षण: पत्तियों में छेद करते हैं और पौधे की पत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं।
      2. नियंत्रण: क्विनालफॉस 25 ईसी 1.5 मिली प्रति लीटर या प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 1.5 मिली प्रति लीटर या डायमिथिएट 30 ईसी 1.0 मिली/ लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • फली बीटल (पिस्सू भृंग)
      1. लक्षण: इसकी इल्लियां भूमि में रहकर जड़ को खाती हैं और बीजपत्रों तथा छोटे पौधों की पत्तियों को छेदकर खाती हैं।
      2. नियंत्रण: फसल पर 5 प्रतिशत फॉलीडॉल चूर्ण 28 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करें। 10 प्रतिशत सेविन चूर्ण का भुरकाव करने पर भी हानि को रोका जा सकता है।
  • टिड्डा
    1. लक्षण: शिशु कोमल छोटी पत्तियों और तनों को काट कर खाते हैं। अत्यधिक प्रकोप से पौधों की वृद्धि रुक जाती है।
    2. नियंत्रण: क्विनॉलफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण या मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत चूर्ण 25 किग्रा/हेक्टेयर की दर से भुरकाव करें।

ग्वार की फसलों से कीटों के नियंत्रण के जैविक उपाय (Organic measures to control pests from guar crops):

  • खेत में स्टिकी ट्रैप का प्रयोग: खेत में 4 से 6 स्टिकी ट्रैप का उपयोग करें। ये ट्रैप्स थ्रिप्स को आकर्षित करके उन्हें फंसने से रोकते हैं।
  • प्रभावित भागों का हटाना: कीट के प्रभावित हिस्सों को तोड़कर नष्ट करें।
  • फेरोमेन ट्रैप का उपयोग: फेरोमेन ट्रैप का उपयोग करें, जिसमें गंध पास का इस्तेमाल किया जाता है। इससे नर कीट आकर्षित होकर फंस जाते हैं।
  • नीम का तेल घोल: प्रति लीटर पानी में एक बड़ा चम्मच नीम का तेल मिलाकर घोल बनाएं और इसे प्रभावित पौधों पर छिड़काव करें।
  • जैविक कीटनाशक का उपयोग: जैविक कीटनाशक जैसे नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, अग्निअस्त्र, दशपर्णी अर्क इत्यादि का उपयोग करें। इसका प्रयोग थ्रिप्स को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  • कवर क्रॉप का उपयोग: इससे थ्रिप्स की प्रवासी प्रतिरोधकता में मदद मिलती है।
  • प्रकाश प्रपंच का उपयोग: खेतों में प्रकाश प्रपंच लगाकर भी कीट को नियंत्रित किया जा सकता है।

क्या आप ग्वार की फसल में कीटों से परेशान हैं? अपना जवाब कमेंट करके बताएं और अगर इस पोस्ट में दी गई जानकारी आपको पसंद आई है तो इसे लाइक और शेयर करें। फसलों से संबंधित ऐसे ही अन्य पोस्ट देखने के लिए 'किसान डॉक्टर' चैनल को तुरंत फॉलो करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q: ग्वार की बुवाई कब की जाती है?
A: ग्वार आमतौर पर भारत में जुलाई से अगस्त के महीनों के दौरान बोया जाता है। ग्वार की खेती के लिए आदर्श तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है।

Q: ग्वार कितने दिन में उगती है?
A: ग्वार को बुवाई से परिपक्वता तक बढ़ने में आमतौर पर लगभग 90 से 120 दिन लगते हैं।

Q: एक एकड़ में ग्वार का कितना बीज लगता है?
A: प्रति एकड़ आवश्यक ग्वार बीज की मात्रा औसतन 5-6 किलोग्राम होती है।

Q: एक बीघा में ग्वार कितना होता है?
A: भारत में ग्वार का उत्पादन औसतन 3 से 4 क्विंटल प्रति एकड़ है, अर्थात प्रति बीघा लगभग 7.5 से 10 क्विंटल।

यदि आप ग्वार की फसल में कीटों से परेशान हैं या इस पोस्ट में दी गई जानकारी आपको पसंद आई है, तो इसे लाइक और शेयर करें। फसलों से संबंधित अन्य पोस्ट देखने के लिए 'किसान डॉक्टर' चैनल को फॉलो करें।

Q: ग्वार का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन सा है?

A: राजस्थान भारत में ग्वार का सबसे बड़ा उत्पादक है। यह देश में कुल ग्वार उत्पादन का 70% से अधिक है। ग्वार का उत्पादन करने वाले अन्य राज्यों में हरियाणा, गुजरात, पंजाब और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। तथापि, राजस्थान अपनी अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियों और ग्वार की खेती के लिए उपयुक्त मृदा प्रकारों के कारण ग्वार का प्रमुख उत्पादक है। राजस्थान में प्रमुख ग्वार उत्पादक जिले जोधपुर, बाड़मेर, नागौर, बीकानेर और जैसलमेर हैं।



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