पोस्ट विवरण
सुने
जीरा
किसान डॉक्टर
23 Jan
Follow

जीरा: रोग, लक्षण, बचाव एवं उपचार | Cumin: Diseases, Symptoms, prevention and treatment

जीरा: रोग, लक्षण, बचाव एवं उपचार | Cumin: Diseases, Symptoms, prevention and treatment

जीरा, जिसे अंग्रेजी में 'cumin' कहा जाता है। यह एक सुगंधित मसाला है जो भारतीय व्यंजनों को और भी स्वादिष्ट बना देता है। इसके साथ ही यह अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है। इसके पौधों की ऊंचाई करीब 2 फीट होती है। जीरा के दानों के साथ इसकी पत्तियां भी सुगंधित होती हैं। जीरा की खेती किसानों के लिए एक आत्मनिर्भरता का स्रोत है। इसलिए, जीरा की खेती एक महत्वपूर्ण कृषि विकास क्षेत्र बन चुकी है।

जीरा की फसल में लगने वाले रोग (Diseases affecting cumin crop)

जीरा की फसल को कई प्रकार के कीटाणु, फंगस और गों के होने का खतरा बना रहता है। जिससे उपज एवं गुणवत्ता में कमी के कारण किसानों को नुकसान हो सकता है। इसलिए, जीरा की फसल में लगने वाले रोगों को पहचानना और उनका प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है। बात करें कुछ प्रमुख रोगों की तो जीरा में पाउडरी मिल्ड्यू रोग (powdery mildew in cumin), जीरा में उकठा रोग (wilt of cumin), जीरा में पछेती झुलसा रोग (alternaria blight of cumin) होने का खतरा अधिक होता है।

जीरा में चूर्णिल आसिता रोग के लक्षण (Symptoms of powdery mildew disease in cumin)

  • इस रोग की शुरुआत में पत्तियों के ऊपरी भाग पर सफेद-धूसर धब्बे दिखाई देते हैं।
  • बाद में धब्बे बढ़कर सफेद रंग के पाउडर में बदल जाते हैं।
  • इससे प्रकाश संश्लेषण में बाधा आती है।
  • प्रभावित पत्तियां सूख कर गिरने लगती हैं।
  • पौधों के विकास में बाधा आती है।
  • इस रोग के कारण उपज में भारी कमी देखी जा सकती है।

जीरा में चूर्णिल आसिता रोग पर नियंत्रण के प्रभावी तरीके (Prevention and treatment of powdery mildew disease in cumin)

  • प्रति एकड़ खेत में 300 मिलीलीटर एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 11% + टेबुकोनाज़ोल 18.3% एस.सी. (देहात एजीटॉप) का प्रयोग करें।
  • प्रति एकड़ खेत में 200 मिलीलीटर एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 18.2% +डिफेनोकोनाजोल 11.4% एस.सी (देहात सिनपैक्ट) का प्रयोग करें।
  • 150 मिलीलीटर प्रोपीकोनाज़ोल 13.9% + डाइफेनोकोनाज़ोल 13.9% ईसी (सिंजेंटा ग्लो-इट) का प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।
  • प्रति एकड़ खेत में 80 मिलीलीटर डाइफेनोकोनाज़ोल 25% ईसी (सिंजेंटा- स्कोर) का प्रयोग करें।
  • 450 ग्राम पायराक्लोस्ट्रोबिन 5% + मेटिराम 55% WG (पीआई इंडस्ट्रीज- क्लच) का प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।

आपके जीरा की फसल किस रोग का प्रकोप अधिक होता है? अपने जवाब हमें कमेंट के माध्यम से बताएं। फसलों को विभिन्न रोगों एवं कीटों से बचाने की अधिक जानकारी के लिए 'किसान डॉक्टर चैनल को तुरंत फॉलो करें। इसके साथ ही इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked question)

Q1: जीरा कितने दिनों में उगता है?

A1: जीरा की फसल करीब 120 दिनों में तैयार हो जाती है।

Q2: जीरे में पहला पानी कब देना चाहिए?

A2: जीरे की बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए। सिंचाई के समय इस बात का ध्यान रखें कि पानी का बहाव तेज न हो। पानी के तेज बहाव के साथ बीज अस्त व्यस्त हो सकते हैं

Q3: भारत में जीरा कहां उगाया जाता है?

A3: भारत में जीरा की खेती राजस्थान और गुजरात में बड़े पैमाने पर की जाती है। इसके अलावा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में इसकी खेती रबी मौसम में की जाती है।

Q4: जीरे की कटाई कैसे की जाती है?

A4: जीरा का बीज जब भूरे रंग के हो जाएं और सूखने लगे तो समझ लें फसल कटाई के लिए तैयार है। फसल की कटाई तने के साथ करें। इसके बाद तने को बांध कर पेपर बैग में रखें। बीज निकालने के लिए पौधों को बैग के अंदर हिलाएं। ध्यान रखें कि कटाई में देर होने पर बीज जमीन पर गिर सकते हैं। जिससे किसानों का नुकसान हो सकता है।

42 Likes
Like
Comment
Share
फसल चिकित्सक से मुफ़्त सलाह पाएँ

फसल चिकित्सक से मुफ़्त सलाह पाएँ