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28 Jan
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कैसे रखें आम के बगीचे को खरपतवार रहित? | Weeds management in Mango

कैसे रखें आम के बगीचे को खरपतवार रहित? | Weeds management in Mango

आम, भारत में गर्मी के मौसम का अभिन्न हिस्सा है और इसे लगभग हर घर के बगीचे में देखा जा सकता है। यह सभी की पसंदीदा एक लोकप्रिय और स्वादिष्ट फल है। आम के बगीचे की सुंदरता और मीठे रसीले फलों का उत्पादन करने के लिए सही सुरक्षा की आवश्यकता है। इस पोस्ट में, हम जानेंगे कि कैसे आम के बगीचे को खरपतवार मुक्त रखा जा सकता है जिससे हम प्राकृतिक रूप से उत्पादित स्वादिष्ट आमों का आनंद ले सकें।

जनवरी-फरवरी महीने में आम की देखभाल | Caring for mango trees during the months of January and February

  • प्रुनिंग और ट्रिमिंग: जनवरी के महीने में, आम के पेड़ों को प्रुनिंग और ट्रिमिंग की जरूरत होती है। पौधों में यदि कोई सूखी टहनियां है या क्षतिग्रस्त पत्तियां हैं तो उन्हें तोड़ कर अलग करें।
  • उर्वरक प्रबंधन: फरवरी महीने में आम के वृक्षों को उर्वरक की आवश्यकता होती है। इस समय उचित मात्रा में वृक्षों में नाइट्रोजन, पोटैशियम और फॉस्फोरस युक्त खाद देना चाहिए। इससे फलों का स्वाद एवं आकार बेहतर होता है।
  • पानी की आवश्यकता: जनवरी-फरवरी में वृक्षों में सिंचाई करना बहुत जरूरी है। यह उनकी ताजगी बनाए रखता है और आमों को विकसित होने में मदद करता है। सुनिश्चित करें कि पानी की आवश्यकता जल्दी पूरी की जाती है ताकि पेड़ सुखा न जाए।
  • वृक्षों की सुरक्षा: आम के वृक्षों की सुरक्षा करना महत्वपूर्ण है। इस समय ठंड अधिक होने के कारण आम के वृक्ष पाला से प्रभावित हो सकते हैं। पाला से बचाने के लिए बाग में सिंचाई करें। आप बाग में धुआं कर के भी वृक्षों को पाले से बचा सकते हैं।
  • रोग एवं कीट प्रबंधन: फरवरी महीने में मंजर आने के समय आम के वृक्षों में रोग एवं कीटों के होने की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे में कुछ समय के अंतराल पर बागों का निरीक्षण करें। रोग एवं कीटों का प्रकोप होने पर तुरंत उपयुक्त फफूंदनाशक एवं कीटनाशक का प्रयोग करें।

आम की फसल में खरपतवारों से होने वाले नुकसान | Damage caused by weeds in the mango

  • खरपतवार मिट्टी में मौजूद पोषण को ग्रहण कर लेते हैं। जिससे वृक्षों को उचित मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाता है।
  • आम के फलों की मिठास में कमी हो सकती है।
  • खरपतवारों के कारण फलों का आकार प्रभावित हो सकता है।
  • आम के बाग में खरपतवारों के होने से उपज में कमी हो सकती है।
  • खरपतवारों के कारण फसल में कई तरह के रोग एवं कीटों के प्रकोप का खतरा बढ़ जाता है।

आम में खरपतवार नियंत्रण | Weed control in mango

निराई-गुड़ाई:

  • आम के बगीचे में संकरी पत्ती वाले खरपतवारों के साथ चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों की समस्या भी होती है। बागों में खरपतवार पनपने पर निराई-गुड़ाई के द्वारा आसानी से नियंत्रण किया जा सकता है।

रासायनिक नियंत्रण:

  • खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए 1 लीटर ग्लाइफोसेट 41% एसएल (राउंडअप खरपतवारनाशी) का प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।
  • खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ खेत में 340-1700 मिलीलीटर पैराक्वाट डाइक्लोराइड 24% एस.एल. (देहात- चॉपऑफ) का प्रयोग करें।

आम के बगीचे में खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए आप किस विधि का प्रयोग करते हैं? अपने जवाब एवं अनुभव हमें कमेंट के माध्यम से बताएं। इस तरह की अधिक जानकारियों के लिए 'खरपतवार जुगाड़' चैनल को तुरंत फॉलो करें। इसके साथ ही इस जानकारी को अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Question)

Q1: आम की अच्छी पैदावार के लिए क्या करें?

A1: अन्य फसलों की तरह आम के पौधों/वृक्षों को भी उचित देखभाल की आवश्यकता होती है। आप सही मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग, खरपतवार प्रबंधन, रोग एवं कीटों पर नियंत्रण, सिंचाई, प्रूनिंग, आदि के द्वारा आम की अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।

Q2: आम के पेड़ के लिए सबसे अच्छी खाद कौन सी है?

A2: आम के वृक्षों में उचित मात्रा में डाई अमोनियम फास्फेट (डीएपी) खाद के साथ, यूरिया एवं म्यूरेट आफ पोटाश (एमओपी) का प्रयोग करना चाहिए।

Q3: आम के पेड़ को पानी कब नहीं देना चाहिए?

A3: अक्टूबर से जनवरी महीने में आम के बगीचे में सिंचाई नहीं करनी चाहिए। इस समय सिंचाई करने से पौधों/वृक्षों में नई शाखाएं आने लगती हैं। जिससे मंजर कम आते हैं। परिणाम स्वरुप फल कम आते हैं और उपज में कमी हो जाती है।

Q4: खरपतवार नियंत्रण क्यों आवश्यक है?

A4: आम के फलों का स्वाद एवं मीठास बनाए रखने के लिए खरपतवारों पर नियंत्रण करना जरूरी है। खरपतवारों की अधिकता से आम के फलों का आकार भी प्रभावित होता है। केवल इतना ही नहीं खरपतवार कई रोग एवं कीटों के पनपने का कारण भी बनते हैं। इसलिए खरपतवारों पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी है।

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