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19 June
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लाख कीट पालन (lac insect farming)


लाख कीट पालन भारत में एक महत्वपूर्ण कृषि पद्धति है, विशेष रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, और महाराष्ट्र में प्रचलित। इसमें सिंथेटिक कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती, और यह ग्रामीण समुदायों के लिए आय का मुख्य स्रोत भी है। लाख की खेती से बनाए गए उत्पाद वार्निश, पेंट, और अन्य उत्पादों में उपयोगी होते हैं।

लाख कीट पालन के फायदे (Benefits of lac insect farming):

  1. अधिक आय : लाख कीट की खेती से किसानों को अच्छी आमदनी होती है।
  2. पर्यावरण के लिए सही : लाख कीट की खेती से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता है और यह पूरी तरह से प्राकृतिक होती है।
  3. विभिन्न उपयोग : लाख कीट का उपयोग चूड़ियां, वार्निश, पॉलिश, आयुर्वेदिक और हर्बल दवाओं में होता है।
  4. बढ़ती मांग : इसके उपयोग से बाजार में इसकी बढ़ती मांग रहती है।
  5. स्वास्थ्यप्रद और सुरक्षित : लाख की खेती पूरी तरह से प्राकृतिक होती है, इसलिए यह स्वास्थ्यप्रद और सुरक्षित होती है।
  6. टिकाऊ उत्पाद : लाख से बने उत्पाद बहुत लंबे समय तक उपयोगी रहते हैं।
  7. सरल प्रबंधन : लाख की खेती का प्रबंधन सरल और आसान होता है।
  8. रोजगार के अवसर : गांवों में लाख की खेती से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
  9. सहायक उद्योगों का विकास : लाख की खेती से जुड़े सहायक उद्योग जैसे प्रोसेसिंग यूनिट्स, मार्केटिंग, और डिस्ट्रीब्यूशन का विकास होता है।

लाख कीट की फसलें: लाख की खेती में एक वर्ष में दो फसलें होती हैं: बैसाखी (ग्रीष्मकालीन) और कतकी (वर्षाकालीन)।

  • बैसाखी फसल : लाख कीटों को अक्टूबर या नवंबर में वृक्षों पर चढ़ाया जाता है। इस फसल को बीहन चढ़ाने के बाद लगभग 8 महीनों में तैयार किया जाता है।
  • कतकी फसल : लाख कीटों को जून या जुलाई में वृक्षों पर चढ़ाया जाता है। इस फसल को बीहन चढ़ाने के बाद लगभग 4 महीनों में तैयार किया जाता है।

लाख कीट पालन की प्रक्रिया (lac insect rearing process) :

वृक्षों की काट-छांट:

  • वृक्षों पर बीहन चढ़ाने या कीट संचारण से पहले वृक्षों की काट-छांट करते हैं।
  • लाख कीट नर्म, मुलायम और रसदार टहनियों पर अच्छा पलता है, इसलिए काट-छांट आवश्यक है।
  • काट-छांट की प्रक्रिया कीट छोड़ने के 6 महीने पहले की जानी चाहिए। उदाहरण के लिए, बैसाखी फसल के लिए काट-छांट अप्रैल माह में की जानी चाहिए। यदि पहले से पेड़ पर लाख नहीं हो तो यह प्रक्रिया मार्च में जब फली आना प्रारंभ हो जाये तभी करनी चाहिए।
  • काट-छांट हल्की होनी चाहिए। अंगूठे (2.5 से.मी. व्यास) से मोटी टहनियाँ न काटें। 1.25 से.मी. से 2.5 से.मी. व्यास की टहनियों को एक हाथ (एक से डेढ़ फीट) की ऊंचाई से काटें।
  • 1.25 से.मी. से कम मोटाई की टहनियों को उनके उत्पत्ति के स्थान से काटें। सूखी, रोगग्रस्त, टूटी या फटी हुई टहनियों को क्षतिग्रस्त स्थान से काटें। सूखे ठूँठ को भी उनके उत्पत्ति स्थान से काट कर निकाल दें।
  • काट-छांट के लिए तेजधार वाली दावली का प्रयोग करें। टहनियाँ तिरछी, साफ और एक बार में काटें। पहली बार काट-छांट करते समय पेड़ों को उचित स्वरूप देने हेतु थोड़ी मोटी डाल को भी काटा जा सकता है।

कीट संचारण: पेड़ों पर कीट संचारण की प्रक्रिया विभिन्न स्थानों पर बीहन लाख की डंडियों को बांधकर की जाती है। इसे तीन प्रकार से किया जाता है :

  • पारम्परिक या कृषक विधि: एक से तीन फीट परिपक्व लाख कीट युक्त टहनियों सहित नए पेड़ों पर फंसा देते हैं।
  • वैज्ञानिक तरीके: बीहन लाख डंडियों का बंडल बनाकर सुतली से बांधते हैं।
  • शत्रु कीटों से सुरक्षा हेतु: 60 मेश नायलॉन की जाली में भरकर पेड़ों पर बांधते हैं।
  • प्रत्येक सौ-सौ ग्राम को 60 मेश की नाईलान जाली थैले (27x12 से.मी. या सुविधानुसार नाप) में भरकर प्लास्टिक सुतली से थैले के दोनों ओर बांध दें।
  • सुतली थोड़ी बड़ी रखें, जिससे वृक्षों की डालियों पर इसे सुतली द्वारा बांधा जा सके।
  • जाली न मिलने पर बीहन लाख की 100 ग्राम की डंडियों का प्लास्टिक सुतली से बांधकर पेड़ों की डालियों पर कई स्थानों पर बांधें।

डंडी / फूंकी उतारना:

  • लाख शिशु कीट का जैसे ही बीहन लाख से निकलना समाप्त हो जाए, लाख लगी खाली डंडी को फूंकी कहते हैं।
  • छिली लाख को शीघ्र से शीघ्र बेच दें, अन्यथा इसमें विद्यमान शत्रु कीट तितली और वयस्क परजीवी बनकर नयी फसल पर अंडे देंगे।

फसल कटाई : बीहन लाख के उत्पादन में फसल कटाई का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह इस प्रक्रिया के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है जब परिपक्व फसल को काटा जा सकता है और अच्छी गुणवत्ता में बीहन लाख प्राप्त की जा सकती है। फसल कटाई के समय निम्नलिखित सुझाव ध्यान में रखने चाहिए:

  • अप्रैल में कटाई : अप्रैल में बीहन लाख के लिए फसल काटना अत्यंत उपयुक्त होता है। इस महीने में फसल काटने से बीहन के वृद्धि योग्य चरण में मिलने वाली हैं।
  • अक्टूबर और नवंबर में कटाई : इन महीनों में भीहन के वृक्षों को काटने पर सिर्फ पपड़ी वाली लाख डंडी को काटें और छुटपुट दानेदार टहनियाँ छोड़ें। इससे बीहन का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
  • अप्रैल में अरी खंड काटाई : अप्रैल में वृक्षों की अरी (कच्ची) लाख को पूरी तरह से काटें। इस समय पर मरी टहनियाँ भी काट दें। इससे उत्तम गुणवत्ता में बीहन लाख प्राप्त होती है।

लाख खेती में चुनौतियां :

  • मौसम का प्रभाव: लाख की खेती मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करती है और अचानक मौसम के बदलाव से फसल प्रभावित हो सकती है।
  • कीट और रोग: लाख कीट और पौधों पर विभिन्न प्रकार के कीट और रोगों से प्रभावित हो सकती है, जिससे फसल को नुकसान हो सकता है।
  • उचित देखभाल: लाख की खेती के लिए नियमित देखभाल और निरीक्षण आवश्यक होते हैं, जिसमें समय और मेहनत लगती है।

क्या आप लाख कीट की खेती करना चाहते हैं या इससे जुड़ी और जानकारियां चाहते हैं ? अपने जवाब एवं अनुभव हमें कमेंट के माध्यम से बताएं। पशुओ के स्वास्थ्य एवं उनके आहार से जुड़ी अधिक जानकारियों के लिए 'पशु ज्ञान' चैनल को तुरंत फॉलो करें। इसके साथ ही इस जानकरी को अधिक किसानों एवं पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | Frequently Asked Questions (FAQs)

Q: लाख कहाँ से प्राप्त होता है?

A: भारत में लाख का लगभग 60% हिस्सा झारखण्ड राज्य से प्राप्त होता है। छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल, अन्य प्रमुख लाख उत्पादक राज्य हैं। इनके अलावा महाराष्ट्र, उड़ीसा मध्य प्रदेश और असम के कुछ क्षेत्रों में भी लाख की खेती की जाती है।

Q: लाख से क्या क्या बन सकता है?

A: लाख से बहुत प्रकार के उत्पाद बनाए जाते हैं इनमें कुछ उत्पाद शामिल हैं: श्रृंगारिक आभूषण (जैसे चूड़ियां, बांगले, हार), सील, विद्युत कुचालकों की वार्निश, फलों और दवाओं पर कोटिंग, और पॉलिश और सजावट की वस्तुएं।

Q: लाख कीट कितने प्रकार के होते हैं?

A: लाख कीट विशेष रूप से दो प्रकार के होते हैं जिन्हें कुसमी और रंगीनी के नाम से जाना जाता है ये दोनों ही वर्ष में दो फसल देते हैं लेकिन प. बंगाल और उड़ीसा के समुद्री क्षेत्र के आस-पास वर्ष में तीन फसल देने वाले भी लाख कीट पाये जाते हैं जो कुसुम, बेर और रेन ट्री वृक्षों पर आसानी से पाले जा सकते हैं।

Q: भारत में लाख की चूड़ियां कहां बनती है?

A: लाख की चूड़ियाँ मुख्य रूप से हैदराबाद शहर में बनाई जाती हैं, इसके अलावा, भारत के अन्य हिस्सों में भी लाख की चूड़ियाँ बनाई जाती हैं, जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल।

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