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21 May
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आम के प्रमुख रोग और उनका प्रबंधन (Major mango diseases and their management)


भारत में आम का उत्पादन कृषि क्षेत्र में सबसे आगे है। हालांकि, कई बार फलों का उत्पादन कम हो जाता है जिसका मुख्य कारण आम के बागों में लगने वाले रोग होते हैं, जिससे आम में उपज कम हो जाती है। आम के पेड़ों को प्रभावित करने वाली कई बीमारियाँ हैं, जिससे उपज में नुकसान होता है। इस लेख में, हम इन बीमारियों के लक्षण और नियंत्रण के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

कैसे करें आम में रोग नियंत्रण (How to control diseases in mango)

पाउडरी मिल्ड्यू रोग :

रोग के लक्षण :

  • इस बीमारी पर फलों पर सफेद चूर्ण या पाउडर दिखाई देता है।
  • इसके कारण आम के फल पर बैंगनी भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं।
  • बीमारी का अधिक प्रकोप होने पर आम की ऊपरी सतह फट जाती है।
  • फटने से कीटाणु फल में प्रवेश कर इसको सड़ा देते हैं और उत्पादन कम हो जाता है।

रोग का नियंत्रण :

  • इसकी रोकथाम के लिए बौर के निकलने के दौरान कवकनाशी दवा का 15 से 20 दिन के अंतराल पर तीन बार छिड़काव करें।
  • रोग ग्रसित पत्तियों को तोड़कर अलग करें।
  • रोग रहित प्रजातियों की बुवाई करें, जैसे कि नीलम, जरदालू, जाहाँगीर, और बंगलोरा।
  • बौर आने के समय, 0.2 प्रतिशत वाले गंधक के घोल का छिड़काव करें, और जरुरत के अनुसार उसे दुहराएँ।
  • कार्बेन्डाजिम 12% + मैंकोजेब 63% WP @ 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
  • 15-20 दिन के अंतराल पर, 2-3 बार डाइनोकैप 1 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

ब्लैक रॉट या काली सड़न :

रोग के लक्षण :

  • इस रोग से आम के फल पर शुरुआत में पीले, हल्के स्लेटी रंग के धब्बे बनते हैं।
  • जो कुछ समय बाद काले रंग के हो जाते हैं। इन काले रंग के धब्बों पर फफूंद के बीजाणु दिखाई देने लगते हैं।
  • जिस कारण से धब्बों के नीचे एवं आस पास का हिस्सा गलना शुरू हो जाता है और बदबू आने लगती है। कुछ समय पश्चात पूरा फल गल जाता है।
  • फफूंद फल की डंडी वाले स्थान से भी अंदर घुस कर फल को सड़ाना शुरू कर देता है.

रोग का नियंत्रण :

  • फलों को सड़ने से बचाने के लिए 0.05 प्रतिशत कार्बेन्डाजिम को गरम पानी में 5 मिनट के लिए डुबो कर उपचारित करें। इसके बाद ही फलों का भंडारण करें।

स्टेम एंड रॉट रोग :

रोग के लक्षण :

  • यह बीमारी आम के डंठल पर लगना शुरू होती है, जो धीरे-धीरे पूरे फल पर गोलाकार धब्बे बना कर फैल जाती है।
  • बाद में फल का रंग काला पड़ जाता है।
  • यह प्रक्रिया दो से तीन दिन में पूरे फल को सड़ा देती हैं।
  • अगर फल पर कहीं कोई चोट या कट है तो सड़न उसी जगह से शुरू होती है।
  • आमतौर पर यह रोग पके हुए फल में देखा गया है।

रोग का नियंत्रण :

  • फलों की तुड़ाई से 15 दिन पहले कार्बेन्डाजिम या थायोफेनेट मिथाईल का छिड़काव करें, इससे तुड़ाई के बाद रोग पर नियंत्रण किया जा सकेगा।

एन्थ्रेक्नोज या श्याम वर्ण :

रोग के लक्षण :

  • यह रोग एक तरह से फल में लगने वाला गुप्त रोग है, जो बाद में दिखाई देता है।
  • इस रोग में आम के फल पर बहुत ही छोटे-छोटे धब्बे या निशान होते हैं। जो उस समय अच्छे से दिखाई नहीं देते हैं।
  • लेकिन जब फल को तोड़कर स्टोर किया जाता है तो उस समय यह रोग फल पर हमला कर इसको पूरा सड़ा देता है।

रोग का नियंत्रण :

  • संक्रमित पत्तियों, फलों, और शाखाओं को बाग से हटा दें।
  • कार्बेन्डाजिम: 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलकर छिड़काव करें।
  • कॉपर आक्सीक्लोराइड: 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर इसका छिड़काव 15-20 दिन के अंतराल पर 2-3 बार करें।
  • क्लोरपायरीफॉस 20%: 15 मिलीलीटर प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
  • रिडोमिल गोल्ड: फफूंदों पर नियंत्रण के लिए 15 लीटर पानी में 30 ग्राम मिलाकर छिड़काव करें।
  • मैन्कोजेब और मेटालैक्सिल: 15 लीटर पानी में 30 ग्राम मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं।

उल्टा सूखा रोग/ डाई बैक रोग :

रोग के लक्षण:

  • आम की टहनी और शाखा ऊपर से नीचे की ओर सूखने लगती है धीरे-धीरे पूरा पेड़ सूख जाता है।
  • पत्तियाँ धीरे धीरे गिरने लगती हैं और पूरा पेड़ झुलस जाता है।
  • तने की जलवाहिनी में भूरापन आ जाता है और वाहिनी सूख जाती है।
  • जल ऊपर नहीं चढ़ पाता है जिससे पेड़ में पानी की कमी हो जाती है और सूखने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

नियंत्रण:

  • रोगग्रस्त टहनियों के सूखे भाग से 25 सेंटीमीटर नीचे से काटकर जला दें।
  • कटे हुए स्थान पर बोर्डो पेस्ट लगाएं ताकि संक्रमण आगे न बढ़े।
  • कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का 0.3 प्रतिशत का छिड़काव करें।
  • ट्राइकोडर्मा युक्त गोबर की सड़ी खाद 4-5 किलो प्रति पेड़ डालें ताकि पेड़ की प्रतिरोधक क्षमता बढ़े।

क्या आप आम की फसल में रोगों से परेशान हैं? अपना जवाब एवं अनुभव हमें कमेंट करके बताएं। इसी तरह की अन्य रोचक एवं महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए 'किसान डॉक्टर' चैनल को अभी फॉलो करें। और अगर पोस्ट पसंद आयी तो इसे लाइक करके अपने किसान मित्रों के साथ साझा करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | Frequently Asked Questions (FAQs)

Q: आम में बौर आने के बाद क्या करना चाहिए?

A: आम के फूल खिलने के बाद अच्छी उपज सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित काम करना चाहिए: पेड़ों की छंटाई करें और पेड़ों को उचित मात्रा में खाद दें। समय-समय पर सिंचाई करें कीटों और बीमारियों पर नियंत्रण रखें और अगर पेड़ पर बहुत अधिक फल हैं, तो उन्हें पतला करें ताकि बाकी फल अच्छे आकार में बढ़ सकें।

Q: आम के पेड़ में कौन-कौन से रोग लगते हैं?

A: आम के पेड़ में विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ हो सकती हैं, जो इसके विकास और उपज को प्रभावित करती हैं। इनमें प्रमुख बीमारियाँ हैं: एन्थ्रेक्नोज, पाउडर फफूंदी, चूर्णिल आसिता, डाई बैक।

Q: आम के फल फटने का मुख्य कारण क्या है?

A: आम के फल फटने के कई कारण हो सकते हैं: पानी की कमी, कैल्शियम की कमी, बोरॉन की कमी, तापमान और आर्द्रता इन सभी समस्या के कारण हो सकते हैं।

Q: आम में सबसे अच्छा उर्वरक कौन सा होता है?

A: आम के वृक्षों में डाई अमोनियम फास्फेट (डीएपी), यूरिया और म्यूरेट आफ पोटाश (एमओपी) के साथ अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद का भी इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा जिंक, कॉपर और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग भी लाभदायक साबित होता है। उर्वरकों की मात्रा पौधों/वृक्षों की आयु पर निर्भर करती है।

Q: आम की अच्छी पैदावार के लिए क्या करें?

A: आम की अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए मंजर आने से पहले सिंचाई का कार्य बंद कर दें। सिंचाई करने से पौधों में नई पत्तियां निकलने लगती हैं, जिससे मंजर कम या नहीं बनते हैं। मंजर आने के बाद फलों के परिपक्व होने तक बाग में उचित मात्रा में नमी बनाए रखें।

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