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13 May
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नेनुआ में चूर्णिल आसिता और झुलसा रोग का प्रबंधन (Management of powdery mildew and blight in Nenua)


चूर्णिल असिता (पाउडरी मिल्डयू) और झुलसा रोग दो आम बीमारियां हैं जो नेनुआ (स्पंज लौकी) के पौधों को प्रभावित करती हैं। यह फफूंद जनित रोग फसल के उपज में काफी नुकसान पहुंचाते हैं।

कैसे करें नेनुआ में चूर्णिल आसिता और झुलसा रोग का नियंत्रण? (How to control powdery mildew and blight in Nenua?)

नेनुआ में चूर्णिल असिता रोग के लक्षण एवं प्रबंधन : चूर्णिल आसिता रोग को पाउडरी मिल्डयू रोग के नाम से भी जाना जाता है। कुछ क्षेत्रों में इसे खर्रा या दहिया रोग के नाम से भी जाना जाता है। यह एक फफूंद जनित रोग है जो नेनुआ के अतिरिक्त परवल, स्क्वैश, खीरा, लौकी, तरबूज, कद्दू, करेला, बैंगन, टमाटर, करेला, भिंडी, पपीता, आम, आदि सब्जियों एवं फलों के पौधों को प्रभावित करती है। शुष्क वातावरण में यह रोग ज्यादा फैलता है।

लक्षण:

  • चूर्णिल असिता से प्रभावित फसलों की पत्तियों और टहनियों पर सफेद रंग के पाउडर की तरह पदार्थ जमने लगता है।
  • इस रोग के कारण पौधों ेमन प्रकाश संश्लेषण की क्रिया सही से नहीं हो पाती है।
  • जैसे जैसे संक्रमण बढ़ता है पत्तियां धीरे-धीरे पीली होने लगती हैं।
  • पौधों का विकास रुक जाता है।

नियंत्रण:

  • चूर्णिल असिता रोग के लिए सहनशील या प्रतिरोधी किस्मों का चुनाव करना चाहिए।
  • नेनुआ के पौधे परजैसे ही लक्षण दिखाई दे तो उन हिस्सों को तुरंत नष्ट कर दें।
  • नेनुआ की फसल को इस रोग से बचाने के लिए फसल चक्र अपनाएं।
  • प्रति एकड़ खेत में 300 मिलीलीटर एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 11% + टेबुकोनाज़ोल 18.3% एस.सी. (देहात एजीटॉप) का प्रयोग करें।
  • प्रति एकड़ खेत में 200 मिलीलीटर एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 18.2% +डिफेनोकोनाजोल 11.4% एस.सी (देहात सिनपैक्ट) का प्रयोग करें।
  • प्रति एकड़ खेत में 300 ग्राम टाटा ताकत (कैप्टन 70% + हेक्साकोनाज़ोल 5% WP) का प्रयोग करें।
  • प्रति लीटर पानी में 2 ग्राम इप्रोवालिकर्ब 5.5% + प्रोपिनेब 61.25% w/w WP (बायर मेलोडी ड्यूओ) मिला कर छिड़काव करें।

नेनुआ में झुलसा रोग के लक्षण एवं प्रबंधन : झुलसा रोग एक कवक जनित रोग है। इन दिनों कई क्षेत्रों में नेनुआ की फसल में इस रोग के लक्षण देखने को मिल रहें हैं। इस रोग के कारण नेनुआ की पत्तियां झुलसी एवं जली हुई सी नजर आती हैं। नेनुआ के अलावा यह रोग टमाटर, बैंगन, आलू, धान आदि जैसी फसलों में भी इस रोग का प्रभाव देखा जाता है।

लक्षण:

  • नेनुआ में झुलसा रोग होने के कारण पौधों की निचली पत्तियों पर भूरे या काले रंग के धब्बे उभरने लगते हैं।
  • कुछ समय बाद धब्बों के किनारे पीले रंग के होने लगते हैं। रोग बढ़ने के साथ इन धब्बों का आकार बढ़ जाता है।
  • पत्तियां झुलसी हुई नजर आती हैं।
  • इस रोग पर नियंत्रण नहीं करने पर पत्तियां मुरझा कर सूखने लगती हैं।

नियंत्रण :

  • लगातार एक ही खेत में बार-बार नेनुआ की खेती करने से इस रोग के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है। नेनुआ की फसल को इस रोग से बचाने के लिए फसल चक्र अपनाएं।
  • नेनुआ की खेती के लिए रोग रहित, स्वस्थ बीज का प्रयोग करें।
  • झुलसा रोग के प्रति सहनशील या प्रतिरोधी किस्मों की बुवाई करें।
  • झुलसा रोग से प्रभावित फसलों के अवशेष जैसे पत्तियां, तनें, फल या बुरी तरह संक्रमित पौधों को खेत से खेत से बाहर निकाल कर नष्ट करें। इसके साथ ही खरपतवारों पर भी नियंत्रण करना आवश्यक है।
  • इस रोग को फैलने से रोकने के लिए बुरी तरह प्रभावित पौधों को जला कर नष्ट कर दें।
  • नेनुआ की फसल में अत्यधिक मात्रा में सिंचाई करने से बचें।
  • खेत में जल जमाव की स्थिति से निजात पाने के लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था करें।
  • इस रोग पर नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ खेत में एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 18.2% + डिफेनोकोनाज़ोल 11.4% SC (देहात सिनपैक्ट) की 200 मिलीलीटर मात्रा का छिड़काव करें।
  • 150 लीटर पानी में 300 मिलीलीटर एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 11% + टेबुकोनाज़ोल 18.3% (देहात ऐजीटॉप, अदामा कस्टोडिया) मिलाकर प्रति एकड़ खेत की दर से छिड़काव करने से भी इस रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है।
  • प्रति एकड़ खेत में 600 से 800 ग्राम मैंकोजेब 75% डबल्यू.पी (इंडोफिल- एम 45, धानुका- एम 45, यूपीएल- यूथेन) का प्रयोग करें।

नेनुआ की फसल में झुलसा रोग और चूर्णिल आसिता पर नियंत्रण के लिए आप किन दवाओं का उपयोग करते हैं? अपने जवाब हमें कमेंट के माध्यम से बताएं। इस पोस्ट में दी गई जानकारी पसंद आई है तो इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें। फसलों को कीट एवं रोगों से बचाने की अधिक जानकारियों के लिए 'किसान डॉक्टर' चैनल को तुरंत फॉलो करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | Frequently Asked Question (FAQs)

Q: झुलसा रोग के लक्षण क्या है?

A: झुलसा रोग फसलों में होने वाली एक खतरनाक रोग है। इस रोग के लक्षण नेनुआ के पौधों की पत्तियों पर देखे जा सकते हैं। प्रभावित पौधों पत्तियों की सतह पर अनियमित आकार के भूरे रंग के धब्बे उभरने लगते हैं। रोग बढ़ने के साथ धब्बों का आकार भी बढ़ने लगता है। इस रोग पर नियंत्रण नहीं करने पर पौधे सूख कर नष्ट हो सकते हैं।

Q: नेनुआ कौन से महीने में लगाई जाती है?

A: नेनुआ की फसल को ग्रीष्मकाल यानि की फरवरी-मार्च में इसकी बुवाई कर सकते हैं। वहीं वर्षाकालीन फसल की बुवाई के लिए जून से जुलाई का महीना सबसे अच्छा माना जाता है।

Q: नेनुआ कितने प्रकार के होते हैं?

A: नेनुआ के फल मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। चिकनी सतह वाली एवं उभरी सतह वाली।

Q: नेनुआ की फसल में कौन-कौन से रोग लगते हैं?

A: नेनुआ की फसल में मुख्य रूप से जड़ एवं तना गलन रोग, गमी स्टेम ब्लाइट रोग, फ्यूजेरियम विल्ट, कोमल फफूंदी रोग, चूर्णिल आसिता, मृदुरोमिल आसिता, एन्थ्रेक्नोज, पीली मोज़ेक वायरस रोग, पत्ती झुलसा रोग, का प्रकोप होता है।

Q: नेनुआ की अच्छी पैदावार के लिए क्या करें?

A: नेनुआ की अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्मों का चयन करें। इसके साथ ही सही समय पर उर्वरकों का प्रयोग करें, खर्ट को खरपतवारों से मुक्त रखें। खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ खेत में 04 किलोग्राम देहात स्टार्टर का प्रयोग करें। फसल को रोग एवं कीटों से बचा कर रखें।

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