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7 May
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मिर्च में थ्रिप्स और फल छेदक कीट का प्रबंधन (Management of Thrips and Fruit Borer in Chilli)


भारतीय मसलों में मिर्च की फसल का एक विशेष स्थान है। मिर्च का इस्तेमाल विभिन्न व्यंजनों के ज़ायके को बढ़ाने में खास भूमिका निभाता है।मिर्च के इस्तेमाल से डायबिटीज, रक्तचाप, जैसे रोगों को नियंत्रित किया जा सकता है। परन्तु इसमें थ्रिप्स और फल छेदक कीटों का आक्रमण सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। इन कीटों के कारण मिर्च की पैदावार में 25% से 50% तक नुकसान हो सकता है। इन कीटों का संक्रमण मिर्च की नर्सरी से ले कर मुख्य खेत तक रहता है, पर फूल आने के समय और फल की अवस्था में इस कीट का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है।

थ्रिप्स और छेदक कीट के लक्षण एवं नियंत्रण (Symptoms and control of thrips and borer insects)

थ्रिप्स : यह कीट बहुत ही छोटे आकार के होते हैं। इसके व्यस्क थ्रिप्स की लम्बाई लगभग 1-2 मिलीमीटर तक होती है। और यह काले और पीले रंग के भी होते हैं। थ्रिप्स कीट मिर्च के पौधों की कोमल पत्तियों और फूलों से रस चूसते हैं। इनके प्रभाव से मिर्च की पत्तियाँ ऊपर की तरफ मुड़ने लगती हैं और पौधों में फलों की संख्या कम होने लगती है।

पौधों से रस चूसने के अलावा थ्रिप्स कीट वायरस जनित रोगों को भी बढ़ावा देते हैं जिसके कारण पौधों का वृद्धि-विकास रुक जाता है।

थ्रिप्स कीट का नियंत्रण :

  • मिर्च को थ्रिप्स कीट से बचाने के लिए प्रतिरोधी किस्मों का चुनाव करें।
  • मिर्च के खेत से खरपतवारों को नष्ट कर दें, कई बार कीट मुख्य फसल की जगह खरपतवारों पर पहले पनपते हैं।
  • इसके अलावा थ्रिप्स कीट को नियंत्रित करने के लिए 4 से 6 स्टिकी ट्रैप प्रति एकड़ खेत में लगाएं।
  • थ्रिप्स पर नियंत्रण के लिए खेत में फेरोमेन ट्रैप यानी गंधपाश का भी इस्तेमाल किया जाता है। फेरोमेन ट्रैप में लगे ल्योर की तरफ नर कीट आकर्षित हो कर फंस जाते हैं। इससे कीटों की संख्या को बढ़ने से रोका जा सकता है।
  • नीम का तेल को प्रति लीटर पानी में एक बड़ा चम्मच मिलाकर छिड़काव करने से थ्रिप्स कीट से नियंत्रण किया जा सकता है।
  • इसके अलावा थ्रिप्स जैसे रस चूसक कीटों को नियंत्रित करने के लिए नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, अग्नि अस्त्र, दशपर्णी अर्क, जैसे जैविक कीटनाशक का उपयोग कर सकते हैं।
  • मिर्च की फसल को थ्रिप्स से बचने के लिए पौधों के चारो तरफ कवर क्रॉप्स के तौर पर गेंदे के पौधे लगाएं।
  • बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम मिर्च के बीज को 1.32 से 4 मिलीलीटर थियामेथोक्सम 30% एफ.एस. (देहात एसियर एफएस) से उपचारित करें।
  • थ्रिप्स कीट का प्रकोप होने के बाद इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एस.जी. (देहात इल्लीगो) दवा प्रति एकड़ 54-88 ग्राम छिड़काव करें।
  • इसके अलावा थियामेथोक्सम 12.6 + लैम्ब्डा साइहलोथ्रिन 9.5%  जेड.सी. (देहात एन्टोकिल) दवा प्रति एकड़ 50-80 मिलीलीटर स्प्रे करें।
  • या फिर फिप्रोनिल 5% एससी (देहात स्लेमाइट एससी) का प्रति एकड़ 400-800 मिलीलीटर पम्प द्वारा छिड़काव करें।
  • इसके अतिरिक्त इमिडाक्लोप्रिड 70% डब्ल्यूजी दवा को 60 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने से थ्रिप्स कीट को नियंत्रित किया जा सकता है।

फल छेदक : फल छेदक कीट के लार्वा अलग-अलग रंग के होते हैं। प्यूपा कीट की पहचान भूरे रंग के कीट के तौर पर की जा सकती है। मिर्च में फल आने के समय यह कीट फलों में छेद करके उसे अंदर से खा कर फसल को नष्ट कर देते हैं। फलों पर छोटे-बड़े आकार के कई छेद देखे जा सकते हैं। प्रभावित फलों का आकार विकृत होने लगता है। कई बार फल छेदक कीट का प्रकोप बढ़ने पर फल एवं फूल विकसित होने से पहले ही झड़ने लगते हैं। इस कीट का प्रकोप बढ़ने पर तने एवं पौधे का ऊपरी भाग सूखने लगता है।

फल छेदक कीट का नियंत्रण :

  • खेत में 6 से 8 फेरोमोन ट्रैप/गंध जाल लगाएं।
  • जैविक विधि से नियंत्रण के लिए प्रति लीटर पानी में 5 मिलीलीटर नीम का तेल मिलाकर छिड़काव करें।
  • प्रति एकड़ खेत में 120 मिलीलीटर लैम्डा साईहेलोथ्रिन 05% EC का छिड़काव करें।
  • प्रति एकड़ खेत में 50 - 80 मिलीलीटर थियामेथोक्सम 12.6 + लैम्ब्डा साईहलोथ्रिन 9.5% जेड.सी. (देहात एन्टोकिल) मिलाकर छिड़काव करें।
  • प्रति एकड़ खेत में 54-88 ग्राम इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एस.जी . (देहात इल्लीगो) का प्रयोग करें।
  • 150 लीटर पानी में 100 मिलीलीटर लैम्डा साईहेलोथ्रिन 2.5 प्रतिशत इसी (अदामा - लैम्डेक्स) मिलाकर छिड़काव करें। (यह मात्रा प्रति एकड़ खेत के अनुसार है।)

टमाटर की फसल में थ्रिप्स और छेदक कीट को कैसे नियंत्रित करते हैं? अपने जवाब एवं अनुभव हमें कमेंट के माध्यम से बताएं। फसलों को विभिन्न रोगों एवं कीटों से बचाने की अधिक जानकारियों के लिए 'किसान डॉक्टर' चैनल को तुरंत फॉलो करें। यदि आपको यह जानकारी महत्वपूर्ण लगी है तो इस जानकारी को अन्य किसानों तक पहुंचाने के लिए इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | Frequently Asked Question (FAQs)

Q: मिर्च का प्रमुख कीट कौन सा है?

A: मिर्च की फसल में सबसे ज्यादा थ्रिप्स का प्रकोप होता है। इसके अलावा मिर्च के पौधे माइट्स, एफिड्स, सफेद मक्खियों, फल छेदक कीट, निमाटोड, लीफ माइनर, जैसे कीटों के कारण भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं।

Q: थ्रिप्स की पहचान कैसे करें?

A: थ्रिप्स कीट आकार में बहुत छोटे होते हैं। इनका रंग पीला और काला होता है। इनकी कुछ प्रजातियां पंख रहित होती हैं। वहीं कुछ प्रजातियों में दो जोड़े छोटे-छोटे पंख पाए जाते हैं।

Q: मिर्च की खेती कौन से महीने में की जाती है?

A: मिर्च की खेती आमतौर पर भारत में गर्मी के मौसम के दौरान की जाती है, जो मार्च से शुरू होती है और जून तक रहती है। मिर्च के बीज बोने का आदर्श समय फरवरी और मार्च के बीच होता है, और फसल आमतौर पर मई और जुलाई के बीच काटी जाती है। हालांकि, खेती का समय मिर्च की विशिष्ट किस्म और खेत के स्थान के आधार पर भिन्न हो सकता है।

Q: 1 एकड़ में मिर्च का उत्पादन कितना होता है?

A: भारत में प्रति एकड़ मिर्च की उपज विभिन्न कारकों जैसे मिर्च की विविधता, मिट्टी के प्रकार, जलवायु, सिंचाई और खेती के तरीकों के आधार पर भिन्न हो सकती है। औसतन, एक किसान प्रति एकड़ लगभग 800 से 1000 किलोग्राम सूखी मिर्च की फसल की उम्मीद कर सकता है।

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