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23 Apr
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मूंग की खेती: खरपतवारों पर नियंत्रण के सटीक उपाय ( Moong cultivation: Weed control measures)


दलहनी फसलों में मूंग की फसल महत्वपूर्ण है। इसमें प्रोटीन एवं आयरन की प्रचुर मात्रा पायी जाती है। मूंग की खेती ज्यादा तापमान में भी जा सकती है साथ ही जल्दी पकने वाली होती है। मूंग की फसल वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का मिटटी में स्थिरीकरण करता है जिससे मिटटी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है साथ ही इससे हरी खाद के रूप में भी उपयोग किया जाता है।

कैसे करें मूँग में खरपतवार नियंत्रण? (How to control weeds in moong?)

मूंग फसल में बुवाई से 25 से 30 दिन तक खेतों में खरपतवारों पर पूरी तरह निगरानी एवं नियंत्रण करना बहुत ही आवश्यक है। खेत में खरपतवारों की अधिकता होने से मूंग की फसल को उचित मात्रा में पोषक तत्व नहीं पहुंच पाता है, जिसके कारण पौधा कमजोर होने लगता है। इसके साथ ही कई फफूंद एवं कीट मुख्य फसल से पहले खरपतवारों पर पनपते हैं। इसलिए बेहतर फसल प्राप्त करने के लिए खरपतवारों पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी है।

मूंग में खरपतवार नियंत्रण के जैविक एवं रासायनिक तरीके :

  • निराई - गुड़ाई : खेत में खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई करें। बुवाई से 20 से 25 दिनों बाद पहली निराई गुड़ाई करनी चाहिए। इसके बाद लगभग 45 दिन के बाद फसल में दूसरी निराई गुड़ाई करें। ऐसा करने से मिटटी में वायु संचार अच्छे से होता है और जड़ों को पोषक तत्व और पानी सही मात्रा में मिलता है। निराई-गुड़ाई करते समय ध्यान रखें की 4-5 सेंटीमीटर से अधिक गहराई पर निराई-गुड़ाई न करें क्यूँकि ऐसा करने से फसल की जड़ों को नुकसान हो सकता है।
  • मूंग में खरपतवारों के नियंत्रण के लिए मल्चिंग या 'पलवार' विधि अपनाएं  इससे खरपतवारों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें फसलों को जमीन के चारों ओर प्लास्टिक कवर, पुआल या फिर पत्तों से अच्छे तरीके से ढक देते हैं उसे ही मल्चिंग कहते हैं। इसके कारण खरपतवारों का अंकुरण और विकास नहीं हो पाता है। इससे फसलों को लंबे समय तक खरपतवारों से सुरक्षित रख सकते हैं।
  • फसल में जैविक उपाय अपनानें के बाद भी अगर खरपतवार नष्ट नहीं होते हैं तो फिर खरपतवारनाशी का उपयोग करना चाहिए। खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए बुवाई से पहले प्रति एकड़ खेत में 400 ग्राम पेंडीमेथलीन 30% ई.सी. दवा का छिड़काव करके इस्तेमाल करें। इसके अलावा बुवाई के 3 दिनों के अंदर-अंदर यानी मूंग के बीज अंकुरित होने से पहले प्रति एकड़ खेत में 400 ग्राम पेंडीमेथालिन का छिड़काव करें।

खरपतवारों के कारण मूंग में होने वाले नुकसान (Damage caused to moong due to weeds) :

  • फसलों से खरपतवार मृदा से पानी, खाद (नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम) जैसे आवश्यक पोषक तत्वों को ग्रहण कर लेते हैं, जिसके कारण मूंग की फसल को इनकी पर्याप्त मात्रा नहीं मिल पाती है। जिससे फसल की वृद्धि और उत्पादकता प्रभावित होती है।
  • खरपतवार मूंग की फसलों को ढककर सूर्य की रोशनी से उन्हें दूर करते हैं, जिससे उन्हें सीधे सूर्य की रोशनी सही से नहीं मिल पाती है इसके परिणामस्वरूप प्रकाश संश्लेषण की क्रिया सही से नहीं होती है जिससे पौधों की वृद्धि और विकास सही से नहीं हो पता है।
  • खरपतवार फसलों में रोगों और कीटों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं, जिससे मूंग की फसल में रोगों और कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है। साथ ही खरपतवारों के कारण मूंग में उपज भी कम हो जाता है।
  • खरपतवारों के कारण मूंग के दानों का आकार छोटा हो सकता है जिससे उनकी गुणवत्ता भी कम हो सकती है। खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए किसानों को विभिन्न तरीकों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है।

खरपतवारनाशक का उपयोग करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • सही मात्रा में खरपतवार नाशक का उपयोग करना बहुत ही महत्वपूर्ण है, इससे फसल को हानि नहीं पहुचती है और खरपतवारों  का पूर्ण रूप से नियंत्रण हो सकता है।
  • खरपतवार नाशक का सही समय पर उपयोग करना आवश्यक है, इससे उसकी प्रभावशीलता बढ़ती है। और शाम के वाट दवा का छिड़काव ज्यादा प्रभावी माना गया है।
  • एक्सपायरी हुई खरपतवार नाशी का उपयोग न करें, खरीदते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
  • खरपतवारनाशक को छिड़काव करते समय फ्लैट फेन नोजल या अच्छे छिड़काव वाले पंप से ही खरपतवारनाशी का छिड़काव करें ताकि दवा आसानी से पूरे पौधे तक पहुचें। जिससे उसका प्रभाव पूरी तरह से फसल पर होता है।
  • खरपतवारनाशक को छिड़काव करने से पहले, या अगर छिड़काव के बाद बारिश होती है, तो ध्यान दें कि जमीन में पर्याप्त नमी होनी चाहिए।
  • खरपतवारनाशक को छिड़काव करने के लिए अनुपातिक शर्तें की जांच करें, जैसे कि तेज हवा या बारिश की संभावना।
  • छिड़काव का ध्यान: छिड़काव करते समय, पीछे पीछे जाना चाहिए ताकि किसी भी भूमिगत फसल को नुकसान न हो।
  • खरपतवारनाशक को छिड़काव करते समय, ध्यान रखें कि फसल के आसपास कोई और फसल न हो, ताकि उस फसल को हानि न पहुचे।
  • हुड का इस्तेमाल करना फसल को खतरे से बचाने में मदद कर सकता है, खासकर जब छिड़काव किसी अन्य फसल के आसपास किया जा रहा हो।
  • खरपतवार नियंत्रण के लिए परिस्थिती के अनुसार, सिफारिश के अनुसार, खरपतवारनाशक का उपयोग करें, और बार-बार उपयोग से बचें।
  • खरपतवार नाशक का छिड़काव की जाने वाली जमीन में वर्मीकंपोस्ट, गोबरखाद का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • इसके अतिरिक्त दवा के साथ चिपको का उपयोग करें जिससे दवा आसानी से पुरे पौधे तक पहुचे और जल्दी असर दिखाए।
  • ये सभी बातें खरपतवारनाशक के सही उपयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए किसान अपनी फसल को खरपतवारों से बचा सकता है।

आप मूंग की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए क्या जुगाड़ करते हैं? अपना जवाब एवं अनुभव हमें कमेंट करके बताएं। इसी तरह की अन्य रोचक एवं महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए 'खरपतवार जुगाड़' चैनल को अभी फॉलो करें। अगर पोस्ट पसंद आयी तो इसे लाइक करके अपने किसान दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | Frequently Asked Question (FAQs)

Q: मूंग बोने का सही समय क्या है?

A: खरीफ मूंग की बुआई के लिए उपयुक्त समय जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह तक कर सकते हैं एवं ग्रीष्मकालीन / गर्मी की मूंग की बुवाई को 15 मार्च तक कर देना चाहिये।

Q: मूंग में लगने वाले रोग कौन से हैं?

A: मूंग की फसल में फफूँद और वॉयरस के द्वारा कई रोग लगते हैं जैसे - पीत शिरा मोजेक, तना झुलसा रोग, पीलिया रोग, सरकोस्पोरा पती धब्बा, जीवाणु पती धब्बा, फफुंदी पती धब्बा और विषाणु रोग प्रमुख रूप से फसल को नुक्सान पहुँचाते हैं।  इनके नियंत्रण के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह से दवा का उपयोग करें।

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