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21 Dec
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नैनो डीएपी: खेती में एक नया आविष्कार

नैनो डीएपी: खेती में एक नया आविष्कार

नैनो डीएपी 8.0% नाइट्रोजन और 16.0% फॉस्फोरस युक्त एक तरल उर्वरक है। अन्य उर्वरकों की तुलना में नैनो डीएपी के कण आकार में छोटे होते हैं। आकार में ये 100 नैनोमीटर से भी कम होते हैं। नैनो डीएपी में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस के नैनो क्लस्टर्स को बायो-पॉलीमर और अन्य एक्सीपिएंट्स के साथ क्रियाशील किया जाता है। जिससे प्लांट सिस्टम के अंदर फैलाव और आत्मसात में सुधार हो सके।

नैनो डीएपी इस्तेमाल करने के क्या फायदे हैं?

  • फसलों की उपज में वृद्धि होती है।
  • फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है।
  • रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी आती हैं।
  • पर्यावरण पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं होता।
  • तरल रूप में होने के कारण इस्तेमाल में आसान है।
  • भंडारण एवं परिवहन में सुविधा होती है।

किन फसलों में नैनो डीएपी का करें इस्तेमाल?

  • नैनो डीएपी का इस्तेमाल मुख्य रूप से अनाज, दालें, सब्जियां, फल, फूल, औषधीय सहित अन्य सभी फसलों में किया जा सकता है।

नैनो डीएपी का कैसे करें उपयोग?

  • नैनो डीएपी का उपयोग बीज उपचार, जड़ एवं कंद उपचार और फसल में छिड़काव के लिए किया जाता है।
  • बीज उपचार: प्रति किलोग्राम बीज को 3-5 मिलीलीटर नैनो डीएपी से उपचारित करें।
  • जड़ एवं कंद उपचार: प्रति लीटर पानी में 3-5 मिलीलीटर नैनो डीएपी मिला कर जड़ एवं कंदों का उपचार करें।
  • फसल में छिड़काव: प्रति लीटर पानी में 2-4 मिलीलीटर नैनो डीएपी मिला कर छिड़काव करें।

क्या आप दानेदार डीएपी की जगह नैनो डीएपी इस्तेमाल करने में इक्षुक हैं? अपने जवाब हमें कमेंट के माध्यम से बताएं। कृषि क्षेत्र में हो रहे आधुनिक बदलाव एवं तकनीकों की अधिक जानकारी के लिए 'कृषि टेक' चैनल को तुरंत फॉलो करें। इसके साथ ही इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें।

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