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19 Apr
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अनानास की खेती: उपयुक्त समय, मिट्टी एवं रोपाई की विधि (Pineapple cultivation: suitable time, soil and planting method)


फल वर्गीय फसलों में अनानास एक महत्वपूर्ण फसल है। भारत में लगभग 1.2 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन के साथ भारत आज अनानास उत्पादन में पाँचवे स्थान पर है। अनानास की खेती मुख्य रूप से केरल, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, असम, और मिजोरम में करते हैं, पर अब मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के किसान भी इसकी खेती करने लगे हैं। केरल, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में अनानास की खेती पुरे 12 महीने करते हैं।

कैसे करें अनानास की खेती? (How to cultivate pineapple?)

जलवायु : अनानास की खेती के लिए नम जलवायु और अधिक बारिश की जरूरत होती है। अनानास में ज़्यादा गर्मी और पाला सहन करने की क्षमता नहीं होती है। इसके लिए उपयुक्त तापमान 22 से 32 डिग्री से. है। दिन और रात के तापमान के बीच में कम से कम 4 डिग्री का अंतर होना चाहिए।

मिट्टी : अनानास की खेती के लिए अच्छी उर्वरक क्षमता वाली बलुई दोमट मिट्टी या रेतीली दोमट मिटटी अच्छी मानी जाती है। इसके अलावा मिटटी में जल निकास आसानी से हो सके ऐसे भूमि का चुनाव करें क्यूँकि जल भराव वाली भूमि में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए। 5 से 6 पी.एच. मान वाली मिटटी अनानास की खेती के लिए अच्छी मानी जाती है।

उचित समय : इसकी खेती साल में दो बार करते हैं पहली जनवरी से मार्च और दूसरा मई से जुलाई के बीच में। और कुछ क्षेत्रों में जहाँ नमी युक्त जलवायु है वहां पर अनानास की खेती साल में कभी भी यानि की पूरे 12 महीने कर सकते हैं।

उन्नत किस्में : भारत में अनानास की प्रमुख चार किस्में प्रचलित हैं

  1. क्वीन किस्म : अनानास की यह किस्म बहुत जल्दी पकती है।
  2. जायनट क्यूइस : यह लेट (पछेती) किस्म के रूप में की जाती है।
  3. रेड स्पैनिशइस : इस किस्म की विशेषता ये हैं की इसमें रोग बहुत ही कम लगते हैं और इसको ताजे फल के रूप में उपयोग किया जाता है।
  4. मॉरिशस : नाम से पता चलता है कि यह एक विदेशी किस्म है।

खेत की तैयारी : अनानास की बुवाई से पहले खेत की तैयारी अच्छी करें।

  • बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई करें और खेत में मौजूद पुरानी फसल के अवशेष पूरी तरह से नष्ट हो जाए। फिर खेत को कुछ समय के लिए खाली छोड़ दे जिससे की खेत की मिट्टी में अच्छी तरह से धूप लग सके।
  • इसके बाद खेत में 15 से 17 सड़ी हुई गोबर की खाद को मिटटी में मिलाकर कल्टीवेटर के माध्यम से दो से तीन बार तिरछी जुताई करके खेत में पानी लगाकर पलेव चला देना चाहिए।  उसके बाद एक बार रोटावेटर से ढेलों को तोड़ कर मिट्टी को भुरभुरा बना कर पाटा चला दें।

पौध रोपण का तरीका :

बुवाई के लिए सकर अनानास के पौधे पर बन रही शाखाओ पर करते हैं, इन्हें सकर, क्राउन और स्लिप कहते हैं। पत्तियों को हटाकर जमीन पर बन रही शाखा में सकर , फलो पर बन रही शाखा में क्राऊन और जमीन से निकलने वाली शाखा पर स्लिप को तैयार करते हैं। इन्हे रोपण से पहले उपचारित करके छाँव में सुखाना चाहिए। सकर से तैयार पौधे 15 महीने में, स्लिप और क्राउन द्वारा तैयार पौधे लगभग 20 से 24 महीने में फल देनें लगते हैं। पौधें की रोपाई के लिए बारिश का सीजन सबसे उपयुक्त होता है, साथ ही बीजों को मेड़ में रोपाई करें और मेड़ से मेड़ की दूरी 1.5 - 2 फीट ही रखें।

खाद प्रबंधन : खेत की जुताई के समय सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट या फिर कोई भी जैविक खाद डालकर मिट्टी में मिला दें।

सिंचाई : यदि अनानास के पौधे का रोपण बारिश के मौसम में किया जाता है तो इसमें सिंचाई की अधिक आवश्यकता नहीं होती है। इसमें सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन विधि को अपनाना सबसे उपयुक्त रहता है। पौधों के अंकुरित होने के बाद 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए।

अनानास को प्रभावित करने वाले रोग :

शीर्ष विगलन : इस रोग का प्रकोप पौधे के साथ-साथ फलो पर भी दिखाई पड़ता है। पौधों पर इस रोग के आक्रमण से पौधों का विकास रुक जाता है और अगर यह रोग फल बनने के समय या बाद में लगता है तो यह पूरी तरह फलो को नष्ट कर देता है।

जड़ गलन : अनानास की फसल में जड़ गलन के कारण जड़ें गलने लगती हैं जिससे पौधा सूखने लगता हैं। यह रोग ज्यादातर उन स्थानों में देखा गया हैं जहाँ पर जल भराव की अवस्था होती हैं।

काला धब्बा : इस रोग के कारण अनानास के पौधें की पत्तियों पर भूरे और काले रंग के धब्बे दिखाई पड़ते हैं जो धीरे-धीरे बढ़ कर पुरे पौधे में फ़ैल जाता है। इसके कारण पौधा अच्छे से विकास नहीं कर पता है |

अनानास में लगने वाले मुख्य कीट :

चूर्णी बग / मिली बग : यह कीट अनानास के पौधों की जड़ों और जमीन की सतह वाले भागों पर नुकसान करता है और पत्तियों एवं फलों से रस चूस लेता हैं।  मिटटी के उपरी भाग पर प्रकोप करने वाले कीटों की तुलना में जमीन के नीचे रहने वाले कीट फसल को ज्यादा नुकसान करते हैं। जड़ों को नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ यह अनानास में वायरस जनित रोगों भी फैलाते हैं।

स्लग (घोंघा) कीट : अनानास में इस कीट की इल्लियां ही फसल को नुकसान पहुँचाती हैं।  शुरुआती अवस्था में इल्लियाँ पत्तियों की निचली सतह पर खुरच कर उन्हें खा जाती है जिसके कारण पत्तियां सूख जाती है। इल्लियां जब बड़ी होती है तो पूरे पौधे पर फैल कर पत्तियों को खा जाती है।  छोटे पौधों पर इनका प्रकोप ज्यादातर दिखाई देता है।

क्या आप अनानास की खेती करना चाहते हैं? अपना जवाब एवं अनुभव हमें कमेंट करके बताएं। इसी तरह की अन्य रोचक एवं महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए 'बागवानी फसलें' चैनल को अभी फॉलो करें। और अगर पोस्ट पसंद आयी तो इसे लाइक करके अपने किसान दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | Frequently Asked Question (FAQs )

Q: अनानास कितने दिन में तैयार हो जाता है?

A: अनानास की बुवाई से लेकर फल पकने तक लगभग 18 से 20 महीने लग जाते है, फल पकने पर उसका रंग लाल-पीला होना शुरू हो जाता है।

Q: अनानास का बीज कहाँ मिलता है?

A: इसकी खेती के लिये कोई बीज नहीं लगता है, बल्कि इसके फल के ऊपरी हिस्से यानी अनानास के ताज की रोपाई की जाती है, जिसे स्लीप या सकर भी कहते हैं।

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