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3 June
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चीकू की खेती (Sapota farming)


चीकू, जिसे सपोडिला के नाम से भी जाना जाता है, भारत में व्यापक रूप से खेती की जाती है, खासकर महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश राज्यों में। भारत में उगाई जाने वाली प्रमुख किस्मों में क्रिकेट बॉल, पाला, कालीपट्टी, पीकेएम -1, सीओ -1 और क्रिकेट बॉल ग्रीन शामिल हैं। चीकू के पेड़ों को गर्म और आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है, और आमतौर पर अच्छी तरह से सूखा मिट्टी में उगाया जाता है। फल विटामिन और खनिजों का एक अच्छा स्रोत है, और इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के पाक अनुप्रयोगों में किया जाता है, जिसमें डेसर्ट, स्मूदी और आइसक्रीम शामिल हैं।

कैसे करें चीकू की खेती? (How to cultivate Sapota?)

मिट्टी : चीकू की खेती के लिए रेतीली, काली और जलोढ़ मिट्टी सबसे उपयुक्त होती हैं। इसे गहरी मिट्टी, छिद्रयुक्त और अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिए। मिट्टी का पीएच 6.0 से 8.0 के बीच होना चाहिए।

जलवायु : चीकू एक उष्णकटिबंधीय फल है और इसे बढ़ाने और विकसित होने के लिए गर्म, आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है। इसकी खेती के लिए आदर्श तापमान 10°C से 38°C के बीच होता है। तापमान 43°C से ऊपर नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह फूल गिरने का कारण बनता है। पाला पड़ने जैसी सर्द जलवायु चीकू की खेती के लिए उचित नहीं होती है।

बुवाई का समय : चीकू की खेती फरवरी से मार्च और अगस्त से अक्टूबर के महीने में की जाती है।

किस्में : देश में चीकू की कई किस्में प्रचलित हैं। उत्तम किस्मों के फल बड़े, छिलके पतले एवं चिकने और गूदा मीठा और मुलायम होता है। झारखंड क्षेत्र के लिए क्रिकेट बाल, काली पत्ती, भूरी पत्ती, पी.के.एम.1, डीएसएच-2 झुमकिया, आदि किस्में अति उपयुक्त हैं।

पौध रोपण :

  • चीकू की बुवाई अगर रेतीली मिट्टी में करनी है तो 60 सेमी x 60 सेमी x 60 सेमी आकार के गड्ढे बनाएं और भारी मिट्टी 100 सेमी x 100 सेमी x 100 सेमी आकार के गड्ढे बनाएं।
  • गड्ढे में 10 किग्रा. गोबर की खाद, 3 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट और 1.5 किलो म्यूरेट ऑफ़ पोटाश और 10 ग्राम फोरेट धूल अथवा नीम की खली (1 किग्रा.) भरते है।
  • गड्ढे भरने के एक महीने बाद मानसून के प्रारंभ में (जुलाई) में पौधों की रोपाई कर देते हैं।
  • चीकू के पौधों का रोपण करने के लिए पौधे से पौधे की दूरी 8 मीटर और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 8 मीटर रखें। और 1 मीटर गहरे गड्ढे में बुवाई की जाती है।

खेत की तैयारी : चीकू की खेती के लिए सबसे पहले 2 से 3 बार खेत की गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें। आखरी जुताई करके मिट्टी में पाटा चला कर खेत को समतल कर लें।

खाद एवं उर्वरक

  • 50 किलो गोबर की खाद प्रति पौधा आवश्यक।
  • 1000 ग्राम नाइट्रोजन, 500 ग्राम फास्फोरस और 500 ग्राम पोटाश प्रति पौधा आवश्यक।
  • आधी मात्रा मानसून के शुरुआत में गड्ढों में डालें।
  • शेष आधी मात्रा सितंबर-अक्टूबर में डालें।
  • अरंडी की खली उच्च गुणवत्ता फसल उत्पादन के लिए फायदेमंद।

सिंचाई :

  • पौधा रोपाई के तुरंत बाद और तीसरे दिन सिंचाई करें।
  • पौधे स्थापित होने तक 10-15 दिनों के अंतर से सिंचाई करें।
  • सर्दियों में 30 दिन और गर्मियों में 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
  • ड्रिप सिंचाई प्रणाली 40% पानी की बचत और 70-75% अधिक आय देती है।
  • प्रारम्भिक 2 वर्षों में पेड़ से 50 सेमी दूरी पर 2 ड्रिपर्स रखें।
  • 5 साल तक पेड़ से 1 मीटर दूरी पर 4 ड्रिपर्स रखें।
  • ड्रिपर्स की निर्वहन दर 4 लीटर/घंटा हो।
  • गर्मियों में 7 घंटे और सर्दियों में 4 घंटे एक दिन छोड़कर ड्रिप सिस्टम चलाएं।
  • पानी की कमी में, सर्दियों में 3 घंटे 30 मिनट और गर्मियों में 5 घंटे 40 मिनट ड्रिप सिस्टम चलाएं।

रोग एवं कीट प्रबंधन : चीकू के पेड़ पर पाए जाने वाले कीट हैं पत्ती वेबर, बालों वाले कैटरपिलर, बड वर्म, स्टेम बोरर, स्केल कीट, मीली बग, लीड माइनर, फल बोरर आदि। चीकू के पौधों को संक्रमित करने वाले रोग हैं सूटी मोल्ड, लीफ स्पॉट, एन्थ्रेक्नोज, बेस रॉट, चपटी शाखाएँ आदि।

कटाई:

  • फलों की शारीरिक परिपक्वता का संकेत छिलके से भूरे रंग की पपड़ीदार परत के निकलने से मिलता है।
  • कटाई के चरण में फल पीले रंग के साथ कॉर्की भूरे रंग के हो जाते हैं।
  • जब फलों पर कोई हरा रंग का ऊतक नहीं दिखाई देता, तो फल कटाई के लिए तैयार होते हैं।
  • वर्षा आधारित क्षेत्र में कटाई मार्च-जून के महीनों के दौरान होती है।
  • सिंचित क्षेत्र में कटाई सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर के महीनों में होती है।

उपज:

  • चीकू के पेड़ प्रतिवर्ष औसतन 100-150 किलो फल देते हैं।
  • पेड़ की उम्र और देखभाल के अनुसार उपज में भिन्नता हो सकती है।
  • उच्च गुणवत्ता और अच्छी देखभाल के साथ उपज बढ़ाई जा सकती है।

क्या आप भी चीकू की खेती करना चाहते हैं ? अगर हाँ तो हमें कमेंट करके बताएं। ऐसी ही रोचक एवं महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए 'बागवानी फसलें' चैनल को अभी फॉलो करें। अगर आपको यह पोस्ट पसंद आयी तो इसे लाइक करके अपने किसान मित्रों के साथ साझा करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions - FAQs)

Q: चीकू का पेड़ कितने साल में फल देता है?

A: चीकू का पेड़ आमतौर पर रोपण के 3-4 साल बाद फल देना शुरू कर देता है। हालांकि, फल की उपज और गुणवत्ता मिट्टी के प्रकार, जलवायु और खेती के तरीकों जैसे विभिन्न कारकों के आधार पर भिन्न हो सकती है।

Q: चीकू का पौधा घर पर कैसे लगाएं?

A: घर पर चीकू का पौधा लगाने के लिए, एक धूप वाला स्थान चुनें और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी को चुनें। रूट बॉल के दोगुने आकार का छेद खोदें, उर्वरक या खाद मिलाएं, और पौधे को छेद में रखें। मिट्टी से बैकफिल करें, पूरी तरह से पानी दें, और पौधे के चारों ओर मल्चिंग करें। नियमित रूप से पानी दें, अधिक पानी से बचें, और हर तीन महीने में संतुलित उर्वरक लगाएं। इस तरीके से 3-4 साल में पौधे में फल आना शुरू हो जाना चाहिए।

Q: चीकू की पौध कैसे तैयार की जाती है?

A: चीकू के पौधे तैयार करने के लिए, पहले पके फलों से बीज निकालें। फिर उन्हें पानी में भिगोकर रखें और सुखाएं। सूखने के बाद, बीज को मिट्टी में बोएं और नियमित रूप से पानी दें। अंकुरित होने में लगभग 2-3 सप्ताह लगेंगे। फिर पौधे को बड़े बर्तन में या सीधे जमीन में लगा सकते हैं।

Q: चीकू की सबसे अच्छी वैरायटी कौन सी है?

A: भारत दुनिया में चीकू के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है, और देश के विभिन्न हिस्सों में उगाए जाने वाले चीकू की कई किस्में हैं। भारत में उगाई जाने वाली चीकू की कुछ लोकप्रिय किस्में क्रिकेट बॉल, काली पट्टी, पाला, द्वारापुडी और पीकेएम-1 हैं। हालांकि, विविधता का चुनाव क्षेत्र की विशिष्ट बढ़ती परिस्थितियों और जलवायु पर भी निर्भर हो सकता है।

Q: भारत में चीकू कहां लगाया जाता है?

A: चीकू, जिसे सपोडिला के नाम से भी जाना जाता है, भारत के कई हिस्सों में लगाया जाता है। भारत में प्रमुख चीकू उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश हैं।

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