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18 June
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अरहर की फसल में खरपतवार प्रबंधन | Weed Management in Pigeon Pea (Arhar)

खरपतवारों की समस्या के कारण अरहर जैसी प्रमुख दलहन फसल को काफी नुकसान होता है। इसकी उपज में करीब 35-40 प्रतिशत तक गिरावट हो सकती है। अरहर की फसल में सकरी पत्ती वाले खरपतवारों के साथ चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों की भी समस्या होती है। अगर आप भी कर रहे हैं अरहर की खेती तो इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ें। यहां से आप अरहर की फसल में खरपतवारों से होने वाले नुकसान, खरपतवारों पर नियंत्रण के विभिन्न तरीके एवं खरपतवार नाशक दवाओं के छिड़काव के समय ध्यान में रखने वाली बातों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अरहर की फसल में खरपतवारों से होने वाले नुकसान | Damage from weeds in Pigeon Pea (Arhar) cultivation

  • पौधों के विकास में बाधा: अरहर की फसल में खरपतवारों की समस्या होने पर पौधों के विकास में बाधा उत्पन्न हो सकती है। पौधों में पोषक तत्वों की कमी होना इसका मुख्य कारण है। खेत में मौजूद खरपतवार पोषक तत्वों को ग्रहण कर लेते हैं। जिससे पौधों की वृद्धि धीमी गति से होती है।
  • गुणवत्ता में कमी: खरपतवारों के कारण अरहर की गुणवत्ता में कमी हो सकती है। इसके दाने छोटे हो सकते हैं। कई बार इसका स्वाद भी प्रभावित हो जाता है।
  • पैदावार में कमी: अरहर की फसल में खरपतवारों की अधिकता से फसल की पैदावार में करीब 35 प्रतिशत तक कमी हो सकती है। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
  • रोग एवं कीटों का प्रकोप: कई तरह के फफूंद एवं कीट खरपतवारों पर पहले पनपते हैं, इसके बाद वे और मुख्य फसल को नष्ट करते हैं। खरपतवारों के कारण कुछ मामलों में पौधे बहुत कमजोर भी हो सकते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी कमी आती है।
  • आर्थिक नुकसान: फसल की उपज और गुणवत्ता में कमी होने के कारण इसकी बिक्री उचित कीमत पर नहीं होती है। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकती है।
  • श्रम की आवश्यकता: खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई या दवाओं के छिड़काव में श्रम एवं समय की आवश्यकता अधिक होती है।
  • लागत में वृद्धि: खरपतवार नाशक का उपयोग करने पर कृषि में होने वाली लागत में वृद्धि होती है। इसके साथ कीट एवं रोगों पर नियंत्रण के लिए भी विभिन्न दवाओं के प्रयोग से लागत में बढ़ोतरी होती है।

अरहर की फसल में खरपतवारों पर नियंत्रण के विभिन्न तरीके | Various methods of weed control in Arhar

खेत की जुताई के द्वारा खरपतवारों पर नियंत्रण

  • अरहर की बुवाई से पहले खेत में गहरी जुताई करें। इससे खेत में पहले से मौजूद खरपतवारों के जड़ ऊपर आ जाते हैं और तेज धूप के कारण नष्ट हो जाते हैं।

निराई-गुड़ाई के द्वारा खरपतवारों पर नियंत्रण

  • खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई एक बेहतर विकल्प है।
  • छोटे क्षेत्र में खेती कर रहे हैं तो आप हाथों से निराई-गुड़ाई कर सकते हैं।
  • बड़े क्षेत्रों के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों का सहारा ले सकते हैं।

खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए फसल चक्र अपनाना

  • फसल चक्र अपनाने से खरपतवारों का चक्र बाधित होता है। इस तरह आसानी से खरपतवारों पर नियंत्रण किया जा सकता है।

खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए रासायनिक विधि

  • प्रति एकड़ खेत में 600-700मिलीलीटर पेंडीमेथलीन 38.7% सीएस (देहात पेंडेक्स प्लस, यूपीएल दोस्त सुपर, बीएएसएफ स्टॉम्प एक्स्ट्रा, धानुका धनुटोप सुपर) का प्रयोग करें।
  • प्रति एकड़ खेत में 300 मिलीलीटर टोप्रामेज़ोन 33.6% एससी (बीएएसएफ टाइनजर) का प्रयोग करें।

खरपतवार नाशक दवाओं के छिड़काव के समय रखें इन बातों का ध्यान | Things to keep in mind while applying herbicides

खरपतवार नाशक दवाओं के छिड़काव के समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

  • एक ही खरपतवार नाशक का बार-बार प्रयोग करने से बचें। बार-बार एक ही दवा इस्तेमाल करने से खरपतवार इसके प्रति सहनशील या प्रतिरोधी हो सकते हैं।
  • एक फसल में एक बार ही रासायनिक खरपतवार नाशक का प्रयोग करें।
  • खरपतवार नाशक दवाओं के पैकेट पर दिए गए निर्देशों को पढ़ें और उनका पालन करें।
  • खरपतवार नाशक दवा का प्रयोग करते समय, मिट्टी में नमी की मात्रा का विशेष ध्यान रखें। मिट्टी में नमी होने से दवा समान रूप से फैल कर अधिक असरदार हो जाता है।
  • कई बार  मात्रा में रासायनिक खरपतवार नाशक दवाओं का प्रयोग मुख्य फसल को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए खरपतवार नाशक दवा का सही मात्रा में छिड़काव किया जाना चाहिए, जिससे फसल पर किसी तरह का बुरा प्रभाव ना हो।
  • खरपतवार नाशक दवा के साथ किसी भी तरह के कीटनाशक दवा या फफूंद नाशक दवा को मिलाना नहीं चाहिए। इससे खरपतवार नाशक दवा का असर कम हो सकता है।
  • खरपतवार नाशक दवाओं में कई तरह के हानिकारक रसायन होते हैं। इसका अधिक प्रयोग खेत की मिट्टी एवं पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
  • रासायनिक दवाओं के संपर्क में आने से त्वचा रोग, आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए दवाओं के छिड़काव के समय आंख, नाक, मूंह एवं त्वचा को बचाने के लिए चश्मे, मास्क, दस्ताने एवं शरीर को अच्छी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें।
  • खरपतवार नाशक दवाओं के संपर्क में आते ही तुरंत उसे पानी से साफ करें और आवश्यकता होने पर नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।

क्या आपने अरहर की फसल में खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए देहात के खरपतवार नाशक दवाओं का प्रयोग किया है? अपने जवाब एवं अनुभव हमें कमेंट के माध्यम से बताएं। इस पोस्ट में दी गई जानकारी पसंद आई है तो इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें। खरपतवारों पर नियंत्रण की अधिक जानकारियों के लिए 'खरपतवार जुगाड़' चैनल को तुरंत फॉलो करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | Frequently Asked Questions (FAQs)

Q: खरपतवार प्रबंधन कैसे किया जाता है?

A: भारत में खरपतवार प्रबंधन विभिन्न तरीकों जैसे सांस्कृतिक प्रथाओं, यांत्रिक तरीकों, रासायनिक तरीकों और जैविक तरीकों के माध्यम से किया जाता है। सांस्कृतिक प्रथाओं में फसल चक्र अपनाना, इंटरक्रॉपिंग और समय पर बुवाई शामिल है। यांत्रिक तरीकों में हाथ से निराई, कुदाल से निराई-गुड़ाई और खेत की जुताई करना शामिल है। रासायनिक तरीकों में शाकनाशी का उपयोग शामिल है।

Q: खरपतवार नियंत्रण की कितनी विधियां हैं?

A: खरपतवार नियंत्रण के चार मुख्य तरीके हैं। जिनमें सांस्कृतिक विधि, यांत्रिक विधि, रासायनिक विधि और जैविक विधि शामिल है।

Q: सबसे अच्छी खरपतवार नाशक दवा कौन सी है?

A: सबसे अच्छी खरपतवार नाशक दवा फसलों के प्रकार, फसल की अवस्था एवं खरपतवारों के प्रकार पर निर्भर करती है। शाक नाशक दवाओं के प्रयोग से पहले इन बातों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही खरपतवार नाशक दवाओं की मात्रा का भी ध्यान रखें।

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