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24 Mar
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उड़द में खरपतवार प्रबंधन | Weeds Management in Black Gram

उड़द में खरपतवार प्रबंधन | Weeds Management in Black Gram

उड़द की बेहतर उपज प्राप्त करने के लिए बुवाई के 30-35 दिनों तक खेत को खरपतवारों से मुक्त रखना आवश्यक है। उड़द की फसल में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार जैसे जंगली चौलाई, जंगली जूट, और सकरी पत्ती वाले खरपतवार जैसे सावां, जंगली ज्वार, मोथा आदि की समस्या अधिक होती है। इन पर नियंत्रण की जानकारी के लिए इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ें।

उड़द की फसल में में खरपतवारों से होने वाले नुकसान | Damage caused by weeds in Black Gram

  • पोषक तत्वों की कमी: खेत में पनपने वाले खरपतवार मिट्टी से पोषक तत्वों को ग्रहण कर लेते हैं, जिससे उड़द के पौधों को सही मात्रा में पोषण नहीं मिलता है।
  • फूल और फलों में कमी: खरपतवार की अधिकता से उड़द के पौधों में फूल और फलियों की संख्या में कमी हो सकती है।
  • फलों का आकार: खरपतवारों के कारण फलियों पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाते हैं। जिससे उनके अंदर दाने कम या छोटे रह जाते हैं।
  • रोग एवं कीटों का प्रकोप: कई तरह के कीट एवं फफूंद खरपतवारों पर पहले पनपते हैं और बाद में मुख्य फसल में हमला करते हैं। जिससे फसल पर नकारात्मक प्रभाव होता है।
  • फसल की उपज में कमी: खरपतवार से होने वाले नुकसान के कारण उड़द की उपज में कमी हो सकती है, जिससे किसानों को मुनाफे की जगह नुकसान का सामना करना पड़ता है।
  • लागत में वृद्धि: खरपतवार नाशक का उपयोग करने पर कृषि में होने वाली लागत में वृद्धि होती है। इसके साथ कीट एवं रोगों पर नियंत्रण के लिए भी विभिन्न दवाओं के प्रयोग से लागत बढ़ती है।
  • आपूर्ति में कमी: खरपतवारों के कारण फसल की सही आपूर्ति नहीं हो पाती है। जिससे बाजार में परवल की कमी हो सकती है और किसानों को मुनाफा की जगह नुकसान उठाना पड़ सकता है। आपूर्ति में कमी परवल की कीमत में वृद्धि का भी कारण बन सकती है।

रासायनिक विधि के द्वारा खरपतवार नियंत्रण

  • बुवाई से पहले प्रति एकड़ खेत में 600 मिलीलीटर फ्लूक्लीरालिन 45 ईसी (बासालिन) का प्रयोग करें।
  • उड़द के अंकुरण से पहले प्रति एकड़ खेत में 1,200 मिलीलीटर पेंडीमेथालिन 30% ईसी (यूपीएल दोस्त, सल्फर मिल्स पेंडिसुल) का प्रयोग करें।
  • उड़द की बुवाई के 15-20 दिनों बाद प्रति एकड़ खेत में 200 लीटर पानी में 300-400 मिलीलिटर क्विज़ालोफ़ॉप इथाइल 5% ईसी (धानुका टारगा सुपर) का छिड़काव करें।

खरपतवारों को नियंत्रित करने के कुछ अन्य तरीके

गहरी जुताई करें

  • बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई करें। इससे खेत में पहले से मौजूद खरपतवार नष्ट हो जाएंगे।
  • आप चाहे तो बुवाई से पहले खेत में निकलने वाले खरपतवारों की जुताई कर उसे खेत में मिला सकते हैं। यह हरी खाद का काम करेगी। इससे खरपतवार नष्ट भी हो जाएंगे और मिट्टी में हरी खाद के प्रयोग से कई पोषक तत्वों की पूर्ति भी हो जाएगी।

फसलों के बीच की दूरी का ध्यान रखें

  • बीज की बुवाई या पौधों की रोपाई के समय दूरी का विशेष ध्यान रखें।
  • आवश्यकता से अधिक दूरी होने पर खरपतवारों को पनपने की जगह मिलती है।

निराई-गुड़ाई करें

  • निराई-गुड़ाई एक प्रमुख तकनीक है जो खरपतवारों को नियंत्रित करने में सहायक हो सकती है।
  • बुआई के बाद, पहली निराई-गुड़ाई को 30 दिनों के बाद किया जा सकता है।
  • इसके बाद, 15 दिन के अंतराल पर या आवश्यकता के अनुसार इस प्रक्रिया को दोहराया जा सकता है।
  • निराई-गुड़ाई करने से फसल को अच्छी तरह से पोषण मिलता है और खरपतवारों को कम करने में मदद मिलती है।

फसल चक्र अपनाएं

  • खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए फसल चक्र अपनाएं।
  • खेत में मौसम के अनुसार विभिन्न फसलों को लगाने से खरपतवारों का जीवन चक्र बाधित हो सकता है।
  • इससे खरपतवारों की समस्या में कमी आती है।

दवाओं के छिड़काव के समय रखें इन बातों का ध्यान | Consider these factors when applying herbicide

खरपतवार नाशक दवाओं के छिड़काव के समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

  • खरपतवार नाशक दवा का प्रयोग करते समय, मिट्टी में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए, जिससे दवा सही रूप से फसल तक पहुंच सके।
  • खरपतवार नाशक दवाओं का छिड़काव सुबह या शाम के समय करना चाहिए।
  • छिड़काव करते समय, खरपतवार नाशक दवा का सही मात्रा में छिड़काव करना चाहिए, जिससे फसल पर कोई अतिरिक्त प्रभाव ना हो।
  • खरपतवार नाशक दवा के साथ किसी भी तरह के कीटनाशक या फफूंदनाशक को मिलाना नहीं चाहिए। इससे खरपतवार नाशक दवा का असर कम हो सकता है।

उड़द की फसल में  खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए आप किस विधि का प्रयोग करते हैं? अपने जवाब एवं अनुभव हमें कमेंट के माध्यम से बताएं। खरपतवार प्रबंधन में सहायता प्राप्त करने के लिए आप टोल-फ्री नंबर 1800-1036-110 पर संपर्क कर सकते हैं और अपनी समस्या का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह की अधिक जानकारियों के लिए 'खरपतवार जुगाड़' चैनल को तुरंत फॉलो करें। इसके साथ ही इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें। जिससे विभिन्न किसान अपने अनुभवों को साझा कर सकें और एक दूसरे को सहायता कर सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | Frequently Asked Question (FAQs)

Q: खरपतवार नियंत्रण की कितनी विधियां हैं?

A: खरपतवार नियंत्रण के कई तरीके हैं जिनका उपयोग कृषि में किया जा सकता है। सबसे आम तरीकों में सांस्कृतिक, यांत्रिक, रासायनिक और जैविक नियंत्रण शामिल हैं। सांस्कृतिक नियंत्रण में खरपतवार की वृद्धि को रोकने के लिए फसल चक्र अपनाया जाता है, इंटरक्रॉपिंग और मल्चिंग जैसी प्रक्रियाएं भी की जाती हैं। यांत्रिक नियंत्रण में हाथ से निराई-गुड़ाई और घास की कटाई के द्वारा खरपतवारों को हटाया जाता है। रासायनिक नियंत्रण में खरपतवारों को मारने के लिए शाकनाशी का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा जैविक उत्पादों का प्रयोग करके भी खरपतवारों से छुटकारा मिल सकता है।

Q: खरपतवार की सबसे बेस्ट दवाई कौन सी है?

A: खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए बाजार में कई तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। विभिन्न फसलों में अलग-अलग दवाओं का प्रयोग किया जाता है। इसके साथ चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार एवं सकरी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए भी अलग दवाएं होती हैं। इसलिए हमेशा अपनी फसलों के अनुसार ही दवाओं का प्रयोग करें।

Q: खरपतवार को कैसे रोके?

A: खेत में खरपतवारों को पनपने से रोकने के लिए फसल को लगाने से पहले गहरी जुताई करें। इससे खेत में पहले से मौजूद खरपतवार नष्ट हो जाएंगे। बुवाई के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज का चयन करें। बुवाई से पहले बीज को अच्छे से साफ करें। इस बात को सुनिश्चित करें की फसलों के बीज के साथ खरपतवारों के बीज न हों। खेत में मल्चिंग करना भी इस समस्या से निजात दिलाता है। इसके साथ ही बुवाई के बाद 2 दिनों के अंदर रासायनिक खरपतवार नाशक का प्रयोग कर के भी हम इस समस्या से बच सकते हैं।

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