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22 Mar
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पौधों की विकास के लिए कौन सी मिट्टी है बेहतर? | Which Soil is Best for Plant Growth?

पौधों की विकास के लिए कौन सी मिट्टी है बेहतर? | Which Soil is Best for Plant Growth?

मिट्टी एक प्राकृतिक संसाधन है जो पौधों और फसलों की वृद्धि के लिए आवश्यक है। यह पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत होती है। यह खनिज, पानी, वायु, कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थों का एक जटिल मिश्रण है। वैसे तो लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में पोषक तत्वों को मिला कर उसे उपजाऊ बनाया जा सकता है। लेकिन जलोढ़ मिट्टी एवं दोमट मिट्टी को पौधों के विकास के लिए सबसे अधिक उपजाऊ माना जाता है। पौधों के लिए सबसे बेहतर मिट्टी के साथ भारत में पाई जाने वाली विभिन्न किस्मों की मिट्टी पर विस्तृत जानकारी के लिए इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ें।

जलोढ़ एवं दोमट मिट्टी में खेती के फायदे | Benefits of Farming in Alluvial and Loamy Soil

  • पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण इस तरह की मिट्टी में उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है।
  • जलोढ़ एवं दोमट मिट्टी में नमी बनाए रखने की क्षमता होती है। जिससे शुष्क अवधि या कम सिंचाई करने पर भी पैधों का विकास बेहतर हो सकता है।
  • इस तरह की मिट्टी में जल धारण क्षमता अच्छी होती है। जिससे यह लम्बे समय तक नमी को बनाए रखता है। शुष्क मौसम के दौरान या सिंचाई की कमी होने पर भी फसलों की बढ़वार सुचारु रूप से होती है।

जलोढ़ मिट्टी एवं दोमट मिट्टी में किन फसलों की खेती की जा सकती है? | Crops that can be Grown in Alluvial Soil and Loamy Soil

  • सबसे अधिक उपजाऊ होने के कारण जलोढ़ मिट्टी एवं दोमट मिट्टी में कई फसलों की खेती की जा सकती है। जिनमें चावल, गेहूं, मक्का, गन्ना, कपास, सोयाबीन, मूंगफली, टमाटर, आलू, प्याज, लहसुन, गाजर, मूली आदि फसलों और सब्जियों के साथ आम, केला, पपीता, अमरूद, जैसे फल शामिल हैं।
  • सबसे अधिक उपजाऊ होने के बाद भी फसलों की उपज उसकी किस्मों, स्थानीय जलवायु, मिट्टी की स्थिति एवं अन्य कारकों के आधार पर भिन्न हो सकती है।

भारत में कितने तरह की मिट्टी पाई जाती है? | Types of Soil Found in India

हमारे देश में कई तरह की मिट्टी पाई जाती है। जिनमें से कुछ प्रमुख निम्न प्रकार हैं।

    • जलोढ़ मिट्टी: भारत के कुछ भूमि क्षेत्र के करीब 40% हिस्से में जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। जलोढ़ मिट्टी नदियों और नालों द्वारा ले जाने वाली गाद, रेत और मिट्टी के जमाव से बनती है। यह मिट्टी नदी घाटियों, बाढ़ के मैदानों और डेल्टा में पाया जाता है। यह कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण कृषि के लिए आदर्श एवं सबसे अधिक उपजाऊ है।

  • दोमट मिट्टी: इस तरह की मिट्टी समान अनुपात में रेत, गाद और मिट्टी के मिश्रण से तैयार होती है। यह एक उपजाऊ मिट्टी है जो नमी और पोषक तत्वों को बनाए रखती है। इस तरह की मिट्टी मध्यम से उच्च वर्षा वाले क्षेत्रों, दक्कन के पठार और पश्चिमी घाटी के क्षेत्रों में पाई जाती है। दोमट मिट्टी सब्जियों, फलों और अनाज वाली फसलों की खेती के लिए उपयुक्त है।

  • काली मिट्टी: इस तरह की मिट्टी आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम से भरपूर होती है। लेकिन इसमें नाइट्रोजन और कार्बनिक पदार्थों की मात्रा कम होती है। काली मिट्टी भारत के दक्कन पठार क्षेत्रों के साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, में पाई जाती है। यह कपास, गेहूं और गन्ने जैसी फसलों के लिए उपयुक्त है।
  • लाल मिट्टी: भारत के पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में लाल मिट्टी पाई जाती है। सामान्यतौर पर इस तरह की मिट्टी में पोषक तत्वों और कार्बनिक पदार्थों की मात्रा कम होती होती है। लेकिन हम उचित मात्रा में उर्वरकों और कार्बनिक पदार्थों को मिला कर लाल मिट्टी को उपजाऊ बना सकते हैं। इस तरह की मिट्टी में दालें, बाजरा और तिलहन आदि की खेती सफलतापूर्वक की जा।
  • लैटेराइट मिट्टी: लैटेराइट मिट्टी भारत के पश्चिमी तटीय क्षेत्र में पाई जाती है। यह मिट्टी चट्टानों से टूट कर बनती है। इस मिट्टी में पोषक तत्वों और कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बहुत कम होती है। मिट्टी जांच के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने के बाद यह मिट्टी कृषि योग्य बन सकती है। लैटेराइट मिट्टी में काजू, नारियल और सुपारी जैसी फसलों की अच्छी उपज होती है।
  • पर्वतीय मिट्टी: यह मिट्टी भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाती है। यह मिट्टी पहाड़ों से टूट कर बनती है। सामान्यतः पर्वतीय मिट्टी पोषक तत्वों और कार्बनिक पदार्थों से भरपूर होती है। चाय, कॉफी और मसालों की खेती के लिए यह उपयुक्त है।
  • मरू मिट्टी: यह मिट्टी शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है। इस तरह की मिट्टी लवणीय और क्षारीय होती है। उपजाऊ नहीं होने के कारण इसमें कैक्टस, डेजर्ट घास और तिलहन जैसी फसलें उगाई जाती हैं। यह मिट्टी मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और पंजाब के कुछ क्षेत्रों में पाई जाती है।
  • इसके अलावा भारत में खारी मिट्टी, पीली मिट्टी, जंगली मिट्टी, और पीट मिट्टी भी पाई जाती है। लेकिन अन्य मिट्टी की तुलना में कृषि के लिए ये कम प्रचलित है।

मिट्टी सी संरचना में सुधार के लिए क्या करें? | Improving Soil Structure: What to Do?

  • कार्बनिक पदार्थ मिलाना: मिट्टी की संरचना में सुधार करने के लिए उसमें कार्बनिक पदार्थों को मिलाना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। इससे मिट्टी की जल धारण क्षमता और पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बढ़ती है। मिट्टी में खाद, फसलों के अवशेष, हरी खाद, आदि के द्वारा कार्बनिक पदार्थों को मिलाया जा सकता है।
  • पीएच स्तर में सुधार: मिट्टी का पीएच स्तर कम होने पर मिट्टी अम्लीय हो जाती है। ऐसे में बुझा हुआ चूना मिला कर इसे संतुलित किया जा सकता है। वहीं पीएच स्तर अधिक होने पर मिट्टी क्षारीय हो जाती है। ऐसी स्थिति में सल्फर या अन्य अम्लीय पदार्थों को मिला कर मिट्टी की संरचना में सुधार किया जा सकता है।
  • फसल चक्र अपनाना: फसल चक्र अपना कर हम मिट्टी के पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार कर सकते हैं। इसके अलावा फसल चक्र अपनाने से रोग और कीटों की समस्या भी कम होती है।

आपके क्षेत्र में किस तरह की मिट्टी पाई जाती है और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आप क्या क्या करते हैं? अपने जवाब हमें बेझिझक कमेंट के माध्यम से बताएं। कृषि संबंधी अधिक जानकारियों के लिए 'कृषि ज्ञान' चैनल को तुरंत फॉलो करें। अन्य किसान मित्रों तक यह जानकारी पहुंचाने के लिए इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | Frequently Asked Question (FAQs)

Q: सबसे कम उपजाऊ मिट्टी कौन सी है?

A: रेतीली मिट्टी को सबसे कम उपजाऊ मिट्टी मन जाता है। रेतीली मिट्टी के कण बड़े होते हैं और इसकी जल धारण क्षमता भी अच्छी नहीं होती है। जिस कारण पौधों को विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व और नमी प्राप्त करने में कठिनाई होती है। इसके अलावा रेतीली मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों और खनिजों का स्तर भी कम होता है। इस तरह की मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों और उर्वरकों को मिला कर इसकी संरचना में सुधार करते हुए इसे उपजाऊ बनाया जा सकता है।

Q: पौधे उगाने के लिए मिट्टी में क्या मिलाना चाहिए?

A: पौधों को उगाने के लिए मिट्टी में गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद एवं अन्य पोषक तत्वों को मिलाना चाहिए। यदि मिट्टी अधिक अम्लीय है तो चूना मिलाएं। वहीं चिकनी मिट्टी में बालू के महीन कण मिलाना लाभदायक होता है। बेहतर परिणाम के लिए मिट्टी में किसी भी उर्वरक या अन्य पदार्थों को मिलाने से पहले उसकी जांच अवश्य कराएं।

Q: भारत में सबसे अच्छी मिट्टी कौन सी है?

A: भारत के मैदानी क्षेत्रों, तटीय क्षेत्रों और पर्वतीय क्षेत्रों में विभिन्न किस्म की मिट्टी पाई जाती है। मिट्टी की संरचना अच्छी होने और पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण पौधों के लिए जलोढ़ मिट्टी सबसे अच्छी होती है।

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